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साँची कहें तोरे आवन से – Sanchi Kahe Tore Aawan Se / Ravindra Jain

 साँची कहें तोरे आवन से हमरे

अंगना में आई बहार भौजी

लक्ष्मी सी सूरत ममता की मूरत

लाखों में एक हमार भौजी


तुलसी की सेवा चंदरमा की पूजा

कजरी जैसा अंगनवा में गूँजा

अब हमने जाना के फगवा सिवा भी

होते हैं कितने त्योहार भौजी


ये घर था भूतन का डेरा

जब से भया तुम्हरा पग फेरा

दुनिया बदल गई हालत सम्भल गई

अन धन के लागे भँडार भौजी


बचपन से हम काका कहि-कहि के हारे

कोई हमें भी तो काका पुकारे

देई दे भतीजा फुलवा सरीखा

मानेंगे हम उपकार भौजी

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