शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह – Shaam Rangeen Hui Hai

 शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह

सुर्मई रंग सजा है तेरे काजल की तरह

पास हो तुम मेरे दिल के मेरे आँचल की तरह

मेरी आँखों में बसे हो मेरे काजल की तरह


मेरी हस्ती पे कभी यूँ कोई छाया ही न था

तेरे नज़्दीक मैं पहले कभी आया ही न था

मैं हूँ धरती की तरह तुम किसी बादल की तरह

सुर्मई रँग सजा है तेरे काजल की तरह


आस्मान है मेरे अर्मानों के दर्पन जैसे

दिल यूँ धड़के कि लगे बज उठे कँगन जैसे

मस्त हैं आज हवाएं किसी पायल कि तरह

सुर्मई रँग सजा है तेरे काजल की तरह


ऐसी रँगीन मुलाक़ात का मतलब क्या है

इन छलकते हुए जज़्बात का मतलब क्या है

आज हर दर्द भुला दो किसी पागल की तरह

सुर्मई रंग सजा है तेरे काजल की तरह

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