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चित्र विचित्र के भजन लिरिक्स : Chitra Vichitra Bhajan Lyrics In Hindi 5

इस भाग में होली के रंग और वृंदावन की यादों से जुड़े भजन विशेष रूप से देखने को मिलते हैं। "रंग बरसे लाल गुलाल वृषभानु लली के मंदिर में" और "आई रे आई शरद पूनम की रात" जैसे भजन त्योहारों के माहौल को जीवंत कर देते हैं। इस भाग के 12 भजनों की लिरिक्स क्रमवार नीचे दी गई हैं ताकि आप हर पंक्ति के साथ भाव में डूब सकें।

मनमोहन खेल रहे होरी मनमोहन होली भजन लिरिक्स

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मनमोहन खेल रहे होरी

दोहा – फागुण महीना लगत ही
जिया मोरा उमंग में
होरी खेले श्याम सुन्दर
श्री राधा जी के संग में।

मनमोहन खेल रहे होरी
मनमोहन
ओ वारे रसिया ओ वारे छैला
ओ वारे रसिया ओ वारे छैला
मनमोहन खेल रहे होली
मनमोहन।।

कोई बचा ना कुन्ज गली में
कुन्ज गली में, कुन्ज गली में
कोई बचा ना कुन्ज गली में
ऐसी मोहन की टोली मनमोहन
मनमोहन खेल रहे होली
मनमोहन।।

कोई बना है रंग रंगीला
रंग रंगीला रसिक रसीला
कोई बना है रंग रंगीला
उड़े गुलाल मले रोली मनमोहन
मनमोहन खेल रहे होली
मनमोहन।।

चुनर भीग गयी सखियन की
गयी सखियन की गयी सखियन की
चुनर भीग गयी सखियन की
रंग में भीग गयी चोली मनमोहन
मनमोहन खेल रहे होली
मनमोहन।।

अबीर गुलाल पीठ में कसके
पीठ में कसके पीठ में कसके
अबीर गुलाल पीठ में कसके
मारत भर भर के झोली मनमोहन
मनमोहन खेल रहे होली
मनमोहन।।

मनमोहन खेल रहे होली
मनमोहन
ओ वारे रसिया ओ वारे छैला
ओ वारे रसिया ओ वारे छैला
मनमोहन खेल रहे होली
मनमोहन।।

रंग बरसे लाल गुलाल वृषभानु लली के मंदिर में लिरिक्स

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रंग बरसे लाल गुलाल
वृषभानु लली के मंदिर में
वृषभानु लली के मंदिर में
सब हो गए लालो लाल
वृषभानु लली के मंदिर में।।

भीगी चुनरी चोली दामन
भीगी चुनरी चोली दामन
मुख हो गए लालो लाल
वृषभानु लली के मंदिर में
रंग बरसें लाल गुलाल
वृषभानु लली के मंदिर में।।

सुन सुन कर साजो की सरगम
सुन सुन कर साजो की सरगम
सब नाचे बजाकर ताल
वृषभानु लली के मंदिर में
रंग बरसें लाल गुलाल
वृषभानु लली के मंदिर में।।

राधा रूप छटा मन मोहनी
राधा रूप छटा मन मोहनी
कर दरश हो मनवा निहाल

वृषभानु लली के मंदिर में
रंग बरसें लाल गुलाल
वृषभानु लली के मंदिर में।।

मन मधुप डूबा रंग रस में
मन मधुप डूबा रंग रस में
सब बोले जय जयकार
वृषभानु लली के मंदिर में
रंग बरसें लाल गुलाल
वृषभानु लली के मंदिर में।।

रंग बरसे लाल गुलाल
वृषभानु लली के मंदिर में
वृषभानु लली के मंदिर में
सब हो गए लालो लाल
वृषभानु लली के मंदिर में।।

वो पहली बार वृन्दावन का जाना याद आता है लिरिक्स

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वो पहली बार वृन्दावन
का जाना याद आता है
मुझे तो आज भी मंजर
सुहाना याद आता है
वो पहली बार वृंदावन
का जाना याद आता है।।

समझ चन्दन लगाई थी
वो ब्रज रज मैंने माथे पर
समझ चन्दन लगाई थी
वो ब्रज रज मैंने माथे पर
सुखद अहसास वो बरसो
पुराना याद आता है
वो पहली बार वृंदावन
का जाना याद आता है
मुझे तो आज भी मंजर
सुहाना याद आता है।।

भुलाकर होश दुनिया की
तेरी चौखट पे बैठा था
भुलाकर होश दुनिया की
तेरी चौखट पे बैठा था
हजारों में बस एक वो ही
दीवाना याद आता है
वो पहली बार वृंदावन
का जाना याद आता है
मुझे तो आज भी मंजर
सुहाना याद आता है।।

तुम्हे देखा तो बस हम
देखते ही रह गए तुमको
तुम्हे देखा तो बस हम
देखते ही रह गए तुमको
नज़र से से हाले दिल तुमको
सुनाना याद आता है
वो पहली बार वृंदावन
का जाना याद आता है
मुझे तो आज भी मंजर
सुहाना याद आता है।।

बसा के मन के मंदिर में
युगल सरकार की झांकी
बसा के मन के मंदिर में
युगल सरकार की झांकी
लिखा जो ‘शांत’ ने उस पल
तराना याद आता है

वो पहली बार वृंदावन
का जाना याद आता है
मुझे तो आज भी मंजर
सुहाना याद आता है।।

वो पहली बार वृन्दावन
का जाना याद आता है
मुझे तो आज भी मंजर
सुहाना याद आता है
वो पहली बार वृंदावन
का जाना याद आता है।।


गिरिराज की शरण में हमें मिल गया ठिकाना लिरिक्स

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गिरिराज की शरण में
हमें मिल गया ठिकाना
गिरिराज की तलहटी
नहीं छोड़ के है जाना
गिरीराज की शरण में
हमें मिल गया ठिकाना।।

गुरुदेव की कृपा से
गिरिराज वास पाया
रहूं नित मगन मैं इनमे
आनंद ह्रदय समाया
संतो का संग पा के
संतो का संग पा के
दिल हो गया दीवाना
गिरीराज की शरण में
हमें मिल गया ठिकाना।।

नहीं मोक्ष की है इच्छा
बैकुंठ मैं ना चाहूँ
जब भी जनम मिले तो
गिरिराज वास पाऊं
कहे ‘चित्र विचित्र’ प्यारे
कहे ‘चित्र विचित्र’ प्यारे
ना कभी हमें भूलाना

गिरीराज की शरण में
हमें मिल गया ठिकाना।।

गिरिराज की शरण में
हमें मिल गया ठिकाना
गिरिराज की तलहटी
नहीं छोड़ के है जाना
गिरीराज की शरण में
हमें मिल गया ठिकाना।।

हमारे ठाकुर है गोविन्द राधे भजन लिरिक्स

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हमारे ठाकुर है गोविन्द राधे
ओ राधे भोरी भारी
गोविन्द सीधे साधे।।

श्री राधा मम बाधा हरो
श्री कृष्ण करो कल्याण
युगल छवि वंदन करूँ
जय जय राधे श्याम
हमारे ठाकुर है गोविंद राधे
ओ राधे भोरी भारी
गोविन्द सीधे साधे।।

वृन्दावन मकरंद है
भंवर करे गुंजार
दुल्हन प्यारी राधिका
दूल्हा नन्द कुमार
हमारे ठाकुर है गोविंद राधे
ओ राधे भोरी भारी
गोविन्द सीधे साधे।।

ब्रज समुद्र मथुरा कमल
वृन्दावन मकरंद
ब्रज गोपी सब पुष्प है
भवरा श्री ब्रजचन्द

हमारे ठाकुर है गोविंद राधे
ओ राधे भोरी भारी
गोविन्द सीधे साधे।।

हमारे ठाकुर है गोविन्द राधे
ओ राधे भोरी भारी
गोविन्द सीधे साधे।।

तेरी बांकी अदा बांके बिहारी भजन लिरिक्स

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तेरी बांकी अदा बांके बिहारी

दोहा – बांके बिहारी की बांकी अदा पे
मैं बार बार बलिहारी जाऊं
जनम जनम वृन्दावन राजा
तेरे चरणन की रज पाऊं।

तेरी बांकी अदा बांके बिहारी
बांकी छवि को देख देख के
बांकी छवि को देख देख के
जग है फ़िदा
तेरी बांकी अदा बांके बिहारी।।

बांकी चितवन बांकी भृकुटि
बांके तेरे नैना
बांकी शीश बंधी है पगिया
बांकी शीश बंधी है पगिया
बांके बिना रहे ना
मोहित चारो संप्रदाय, बांके बिहारी
तेरी बांकी अदा बांके बिहारी।।

तेरी बांकी छवि है प्यारी
ओ मेरे बांके बिहारी
या छवि पे हरिदास गए थे
या छवि पे हरिदास गए थे
बार बार बलिहारी
उनके मन में विरहा, बांके बिहारी
तेरी बांकी अदा बांके बिहारी।।

तेरी सुन्दर छवि को है
भक्तों आँखे प्यासी
पागल आया द्वार तिहारे
पागल आया द्वार तिहारे
लखने झलक जरा सी

थोड़ी कर दो कृपा, बांके बिहारी
तेरी बांकी अदा बांके बिहारी।।

तेरी बाँकी अदा बांके बिहारी
बांकी छवि को देख देख के
बांकी छवि को देख देख के
जग है फ़िदा
तेरी बांकी अदा बांके बिहारी।।

मेरे मुरली वाले श्याम आजा रे आजा लिरिक्स

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आजा रे आजा
आजा रे आजा
मेरे मुरली वाले श्याम
आजा रे आजा
मेरे राधा वाले श्याम
आजा रे आजा
मेरे सखियों वाले श्याम
आजा रे आजा।।

नरसी ने जब तुझे बुलाया
दौड़ा दौड़ा आया
टूटी गाड़ी का पहिया
तूने अपने हाथ लगाया
मुझको पड़ गया तुझसे काम
आजा रे आजा
मेरे मुरली वालें श्याम
आजा रे आजा।।

मीरा ने जब तुझे बुलाया
दौड़ा दौड़ा आया
जब चाहा तब मीरा को तूने
आके दरश दिखाया
मेरे प्राणो के आधार
आजा रे आजा
मेरे मुरली वालें श्याम
आजा रे आजा।।

आजा रे आजा
आजा रे आजा
मेरे मुरली वाले श्याम
आजा रे आजा
मेरे राधा वाले श्याम
आजा रे आजा
मेरे सखियों वाले श्याम
आजा रे आजा।।

हमको रुला दिया है तेरी याद ने कन्हैया भजन लिरिक्स : Humko Rula Diya Hai Teri Yaad Ne Kanhaiya

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हमको रुला दिया है
तेरी याद ने कन्हैया
पागल बना दिया है
तेरी याद ने कन्हैया
हमको रुला दिया हैं
तेरी याद ने कन्हैया।।



नन्दलाल इतने निष्ठुर
निर्मोही हो गए हो
निर्मोही हो गए हो
वादा भुला दिया है
तेरी याद ने कन्हैया
हमको रुला दिया हैं
तेरी याद ने कन्हैया।।

बरसों से नैना बरसे
तुझे देखने को तरसे
बस तुझे देखने को तरसे
विरही बना दिया है
तेरी याद ने कन्हैया
हमको रुला दिया हैं
तेरी याद ने कन्हैया।।

सावन अंगार बरसे
फागुन होरी को तरसे
फागुन होरी को तरसे
इस दिल को जला दिया है

तेरी याद ने कन्हैया
हमको रुला दिया हैं
तेरी याद ने कन्हैया।।

हमको रुला दिया है
तेरी याद ने कन्हैया
पागल बना दिया है
तेरी याद ने कन्हैया
हमको रुला दिया हैं
तेरी याद ने कन्हैया।।

मन मोहन दी बन के दीवानी मैं छम छम नचदी फिरा लिरिक्स

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मन मोहन दी बन के दीवानी
मैं छम छम नचदी फिरा
मैं छम छम नचदी फिरा
ओहदे प्रेम विच हुई मस्तानी
मैं छम छम नचदी फिरा
मैं छम छम नचदी फिरा।।

हो गयी मैं प्रीतम दी कमली
लोकी मैनू आखन पगली
जदो वेखी मैं सूरत नूरानी
मैं छम छम नचदी फिरा
मैं छम छम नचदी फिरा।।

जग विच मैनू कोई ना जचदा
हर वेले करां श्याम दा सजदा
सारी दुनिया तो हुई बेगानी
मैं छम छम नचदी फिरा
मैं छम छम नचदी फिरा।।

छड दीती सब रिश्तेदारी
‘चित्र विचित्र’ दे बांके बिहारी
ओहदे नाल मेरी प्रीत पुरानी
मैं छम छम नचदी फिरा
मैं छम छम नचदी फिरा।।

मन मोहन दी बन के दीवानी
मैं छम छम नचदी फिरा
मैं छम छम नचदी फिरा
ओहदे प्रेम विच हुई मस्तानी
मैं छम छम नचदी फिरा
मैं छम छम नचदी फिरा।।

ये तो अधमन की खरीदार हमारी राधा रानी लिरिक्स

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ये तो अधमन की खरीदार
हमारी राधा रानी
हमारी राधा रानी
हमारी राधा रानी
या ने मोह लियो नन्द कुमार
हमारी राधा रानी
ये तों अधमन की खरीदार
हमारी राधा रानी।।



बरसाने में सदा विराजे
वृन्दावन में सदा विराजे
ये तो सखियन की सरताज
हमारी राधा रानी
ये तों अधमन की खरीदार
हमारी राधा रानी।।

जो कोई इनकी शरण में आवे
मन चाही वो वस्तु पावे
ये तो खोल देवे भण्डार
हमारी राधा रानी
ये तों अधमन की खरीदार
हमारी राधा रानी।।

परम दयालु ना देखि जग में
भरो दुलार चरण रज कण में
ये तो पतितन की रिझवार
हमारी राधा रानी
ये तों अधमन की खरीदार
हमारी राधा रानी।।

ऊँचे महल अटारी वारी
अब तो कृपा करो नथ वारी
हो ‘रंगीली’ चरण बलिहार
हमारी राधा रानी
ये तों अधमन की खरीदार
हमारी राधा रानी।।

ये तो अधमन की खरीदार
हमारी राधा रानी
हमारी राधा रानी
हमारी राधा रानी
या ने मोह लियो नन्द कुमार
हमारी राधा रानी
ये तों अधमन की खरीदार
हमारी राधा रानी।।

प्यार करता है बांके बिहारी जमाना तुम्हें प्यार करता लिरिक्स

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प्यार करता है बांके बिहारी
जमाना तुम्हें प्यार करता
प्यार करता
जमाना तुम्हें प्यार करता
राधा रसिक बिहारी तुमसे
प्यार करता हूँ
हर पल पल हर क्षण क्षण
इंतजार करता हूँ
बड़ी देर भई आजा आजा आजा
आई याद तेरी आजा आजा आजा
प्यार करता
जमाना तुम्हें प्यार करता।।

हम है तुम्हारे और तुम हो हमारे
तुम ही हो भक्तों के प्राणन प्यारे
दिल कहता है बांके बिहारी
जमाना तुम्हें प्यार करता
प्यार करता
जमाना तुम्हें प्यार करता।।

दर पे तुम्हारे झुके सारा जमाना
सारा जमाना तेरा हुआ है दीवाना
तुम्हे चाहता है बांके बिहारी
जमाना तुम्हें प्यार करता
प्यार करता
जमाना तुम्हें प्यार करता।।

बांकी अदाओं से जग किया घायल
मैं भी बना हूँ तेरे प्यार में पागल
नाज करता है बांके बिहारी

जमाना तुम्हें प्यार करता
प्यार करता
जमाना तुम्हें प्यार करता।।

प्यार करता है बांके बिहारी
जमाना तुम्हें प्यार करता
प्यार करता
जमाना तुम्हें प्यार करता
राधा रसिक बिहारी तुमसे
प्यार करता हूँ
हर पल पल हर क्षण क्षण
इंतजार करता हूँ
बड़ी देर भई आजा आजा आजा
आई याद तेरी आजा आजा आजा
प्यार करता
जमाना तुम्हें प्यार करता।।


आई रे आई शरद पूनम की रात भजन लिरिक्स

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आई रे आई शरद पूनम की रात
मुझ बिरहन की श्याम पिया से
मुझ बिरहन की श्याम पिया से
होगी अब मुलाकात
आई रे आई शरद पुनम की रात।।

आज मैं सौलह श्रृंगार करुँगी
मोतियन सो मैं मांग भरूंगी
माथे बिंदिया नाक नथनिया
माथे बिंदिया नाक नथनिया
कंगना पहनू हाथ
आई रे आई शरद पुनम की रात।।

कानन कुण्डल नैनन कजरा
केश सजाऊँ फूलन गजरा
हाथन मेहंदी होंठन लाली
हाथन मेहंदी होंठन लाली
मैं मन ही मन हर्षात
आई रे आई शरद पुनम की रात।।

पचरंग साड़ी ओढ़ चुनरिया
अपने पिया की बनूँ मैं दुल्हनिया
धीर धरे ना पागल मन अब
धीर धरे ना पागल मन अब
दर्शन को ललचात
आई रे आई शरद पुनम की रात।।

स्वर्णिम बेला आई मिलन की
पीर मिटेगी मुझ बिरहन की
‘चित्र विचित्र’ भी बाँध के घुंघरू
‘चित्र विचित्र’ भी बाँध के घुंघरू
नाचे पी के साथ

आई रे आई शरद पुनम की रात।।

आई रे आई शरद पूनम की रात
मुझ बिरहन की श्याम पिया से
मुझ बिरहन की श्याम पिया से
होगी अब मुलाकात
आई रे आई शरद पुनम की रात।।

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देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

 उठो धरा के अमर सपूतों -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी/देशभक्ति की कविता उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।1।। डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।2।। कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।3।। सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है। तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।4।। -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप/देशभक्ति कविता ऐ मेरे वतन के लोगो...

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