सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

चित्र विचित्र के भजन लिरिक्स : Chitra Vichitra Bhajan Lyrics In Hindi 10

इस श्रृंखला के अंतिम और दसवें भाग में शरद पूर्णिमा, राधा-कृष्ण की लीलाओं और भक्ति भाव से ओतप्रोत 11 भजन शामिल हैं। "आई पूनम की रात बड़े भागन से शरद पूर्णिमा" और "खुल गया बैंक राधा रानी के नाम का" जैसे भजन इस संकलन को एक सुंदर विराम देते हैं। सभी भजनों की पूरी लिरिक्स नीचे दी गई है।

तेरी महफिल में गुनगुनाने से दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से…

Video thumbnail


तेरी महफिल में गुनगुनाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से
तेरी महफ़िल में गुनगुनाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से।।

मुझे अपना के छोड़ मत देना
डर मुझे लगता है रूठ जाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से
तेरी महफ़िल में गुनगुनाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से।।

तेरी चौखट को चूमता ही रहूं
ना हटू गैर के हटाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से
तेरी महफ़िल में गुनगुनाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से।।

मुझे मदहोश बना ही डाला
जब से आया मैं तेरे मयखाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से
तेरी महफ़िल में गुनगुनाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से।।

मेरी जुबां पर जिक्र तेरा रहे
बेफिकर हो गया मैं अब मर जाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से
तेरी महफ़िल में गुनगुनाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से।।

मिल गई मंजिले सफर मुझको
तेरे कदमों में सर झुकाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से
तेरी महफ़िल में गुनगुनाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से।।

मिला है तोहफा हमको पागल का
चित्र विचित्र की गजल गाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से

तेरी महफ़िल में गुनगुनाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से।।

तेरी महफिल में गुनगुनाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से
तेरी महफ़िल में गुनगुनाने से
दोस्ती हो गई मुझ दीवाने से।।



हमारे श्याम आज दूल्हा बने है भजन लिरिक्स

Video thumbnail


हमारे श्याम आज दूल्हा बने है
दूल्हा बने है बनड़ा बने है
हमारे श्याम आज दूल्हा बने हैं।।

शीश श्याम के सेहरा सोहे
शीश श्याम के सेहरा सोहे
गल में हार पड़े है
गल में हार पड़े है
हमारे श्याम आज दूल्हा बने हैं।।

अधर श्याम के पान की लाली
अधर श्याम के पान की लाली
होठों पे मुरली धरे है
होठों पे मुरली धरे है
हमारे श्याम आज दूल्हा बने हैं।।

‘चित्र-विचित्र’ मिल गावे बधाई
‘चित्र-विचित्र’ मिल गावे बधाई
बंदन वार सजे है
बंदन वार सजे है
हमारे श्याम आज दूल्हा बने हैं।।

हमारे श्याम आज दूल्हा बने है
दूल्हा बने है बनड़ा बने है
हमारे श्याम आज दूल्हा बने हैं।।

मैं नन्दलाल ना भुलाउंगी राणा मारो या छोड़ो भजन लिरिक्स

Video thumbnail


मैं नन्दलाल ना भुलाउंगी
राणा मारो या छोड़ो
मारो या छोड़ो राणा
मारो या छोड़ो
श्याम का नाम ना भुलाउँगी
राणा मारो या छोड़ो।।

पहला प्याला जहर का जो आया
पहला प्याला जहर का जो आया
अमृत समझ मैंने कंठ लगाया
अमृत समझ मैंने कंठ लगाया
कैसे यूँ ही मर जाउंगी
राणा मारो या छोड़ो
मैं नन्दलाल ना भुलाउँगी
राणा मारो या छोड़ो।।

दूजा पिटारा जो नागो का आया
दूजा पिटारा जो नागो का आया
शालिग्राम जी का दर्शन पाया
शालिग्राम जी का दर्शन पाया
ऐसी झांकी कहाँ पाऊँगी
राणा मारो या छोड़ो
मैं नन्दलाल ना भुलाउँगी
राणा मारो या छोड़ो।।

तीजी जो शूलों की सेज बिछाई
तीजी जो शूलों की सेज बिछाई
फूलों की खुशबु मेरे मन को भाई
फूलों की खुशबु मेरे मन को भाई
फिर क्यों ना सेज सो जाउंगी
राणा मारो या छोड़ो
मैं नन्दलाल ना भुलाउँगी
राणा मारो या छोड़ो।।

चौथे चिता में जो मुझको बिठाया
चौथे चिता में जो मुझको बिठाया
गिरधर ने मुझको अमर बनाया
गिरधर ने मुझको अमर बनाया
ऐसी गोदी का सुख पाऊँगी
राणा मारो या छोड़ो

मैं नन्दलाल ना भुलाउँगी
राणा मारो या छोड़ो।।

मैं नन्दलाल ना भुलाउंगी
राणा मारो या छोड़ो
मारो या छोड़ो राणा
मारो या छोड़ो
श्याम का नाम ना भुलाउँगी
राणा मारो या छोड़ो।।

श्यामा जू की पायल के घुँघरू नृत्य करत में बिखर गए लिरिक्स

Video thumbnail


श्यामा जू की पायल के घुँघरू
नृत्य करत में बिखर गए
प्यारी जू की पायल के घुँघरू
नृत्य करत में बिखर गए।।

नव निकुञ्ज में नृत्य करे दोऊ
प्रीतम संग श्यामा प्यारी
अद्भुत छवि है नित्त रास की
जाए सखी सब बलहारी
टूटी पायल बिखरे घुंघरू
घुंघरू बिखर के किधर गये
प्यारी जू की पायल के घुँघरू
नृत्य करत में बिखर गए।।

मन मोहन मन में मलिन अति
व्याकुलता भारी छाई
शब्द सुने नहीं नूपुर के कही
श्यामा जु अति अकुलाई
गए किधर अनमोल ये घुंगरू
इधर गये के उधर गये
प्यारी जू की पायल के घुँघरू
नृत्य करत में बिखर गए।।

श्री ललिता जू सखी सहचरी
ढूंढ रही मिलकर घुंगरू
सुनी पायल बिन घुंगरू के
पग में बंधे नहीं घुंगरू
कैसे बजे वो घुँघरू बंधकर
पायल से कैसे उतर गए
प्यारी जू की पायल के घुँघरू
नृत्य करत में बिखर गए।।

कभी निधिवन कभी सेवाकुंज में
ढूंढ रही यमुना तट पर
श्री हरिदासी जु ढूंढ के लाइ
घुंघरू मिले बंशीवट पर
बंधे घुँघरू और बाजी पायल
पागल के सुख उभर गए

प्यारी जू की पायल के घुँघरू
नृत्य करत में बिखर गए।।

श्यामा जू की पायल के घुँघरू
नृत्य करत में बिखर गए
प्यारी जू की पायल के घुँघरू
नृत्य करत में बिखर गए।।

आई पूनम की रात बड़े भागन से शरद पूर्णिमा भजन लिरिक्स

Video thumbnail


आई पूनम की रात बड़े भागन से
आज होगी मुलाकात मेरी साजन से
आयी पूनम की रात बड़े भागन से।।

फिर से बाजेगी उनकी मुरलिया
छम छम छनकेगी पाँव में पायलिया
होगी मधुर मधुर बात बड़े भागन से
आज होगी मुलाकात मेरी साजन से
आयी पूनम की रात बड़े भागन से।।

आई मिलन की स्वर्णिम बेला
अजर अमर मेरा पिया अलबेला
मिली प्रेम की सौगात बड़े भागन से
आज होगी मुलाकात मेरी साजन से
आयी पूनम की रात बड़े भागन से।।

मोतियन मांग सजाऊंगी सजनी
आई आई रे सखी शरद की रजनी
तान बंसी बजात बड़े भागन से
आज होगी मुलाकात मेरी साजन से
आयी पूनम की रात बड़े भागन से।।

महका मधुबन खिल गई कलियाँ
सज गई ‘चित्र विचित्र’ सब अलियाँ
आज पकड़ेंगे हाथ बड़े भागन से

आज होगी मुलाकात मेरी साजन से
आयी पूनम की रात बड़े भागन से।।

आई पूनम की रात बड़े भागन से
आज होगी मुलाकात मेरी साजन से
आयी पूनम की रात बड़े भागन से।।

थे तो आरोगो नी मदन गोपाल कटोरो ल्याई दूध को भरो लिरिक्स

Video thumbnail


थे तो आरोगो नी मदन गोपाल
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

दूदाजी म्हने दई बुलावण
जद मैं आई चाल
धोली गाय को दूध गरम कर
ल्याई मिसरी डाल
क्याने रूठ गया मेड़तिया भगवान
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

किस विध रूठ गया छो बाला
कारण काह महाराज
दूध कटोरो धरयो सामने
पीवण री काई लाज
भूखा मरता रा पिच ज्यासी थारा गाल
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

श्याम सलौने दूध आरोगो
साची बात बताऊँ
विना पियां यो दूध कटोरो
पाछी लेर न जाऊँ
देस्यूं सांवरिया चरणां में देह त्याग
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।


करुणा सुन डरिया प्रभु जी
मन्द मन्द मुसकात
गट गट दूध पिवण ने लाग्या
चारभुजा रा नाथ
प्रभु राखोजी भक्तों री जाती लाज
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

हरष चली मीरा महला में
खाली कटोरो लेय
दूध प्याय दादा दूदा ने
दियो कटोरो देय
खाली देखत ही कटोरो राव रिषाय
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

अब मीरा पर आफत आई
झूठी साँची कहिवे
साचत दूध पियो प्रभुजी ने
कौन गवाही देवे
थाने नजरां सूं दिखाऊँ चालो साथ
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

भरयो कटोरो लेय सब मिल
ले मीरा न सागे
सारां देखत दूध कटोरो
धरयो प्रभुजी के आगे
मीरा ऊबी-ऊबी करे अरदास
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

दया करो दीनों के स्वामी
अब पत राखो म्हारी
काल कटोरो झटके पी गया
अब क्यों करते देरी
काँई शरमाया मीरा का सरजनहार
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

सुनी प्रेम की टेर प्रभुजी
मन्द-मन्द मुस्काया
मीरा दासी जान दयानिधि
च्यारूँ हाथ बढाया
पी गया मीरा को कटोरो दूध उठाय
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

मीरा नृत्य करे प्रभु के आगे
हरख्यो सारो साथ
भक्तो के वश में गिरधारी
चार भुजा रो नाथ
प्यारो लागे जी मेड़तियो भगवान
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

थे तो आरोगो नी मदन गोपाल
कटोरो ल्याई दूध को भरो।।

खुल गया बैंक राधा रानी के नाम का लिरिक्स : Khul Gaya Bank Radha Rani Ke Naam Ka Lyrics

Video thumbnail


खुल गया बैंक राधा
रानी के नाम का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का।।

खाता खुलवाने में भक्तो
लगता ना कोई खर्चा
लगता ना कोई खर्चा
देर करो ना जल्दी आके
भर लो अपना परचा
भर लो अपना परचा
घाटे का नहीं है सौदा
खाता बड़े काम का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का।।

कान्हा के संग अपनी सेटिंग
है पुरे जीवन की
है पुरे जीवन की
बिना कमीशन लोन करा लो
बात नहीं टेंशन की
बात नहीं टेंशन की
प्रॉफिट ही प्रॉफिट मिलता
लॉस नहीं काम काम
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का।।

सेविंग खाता तुम खुलवाओ
या खुलवाओ करंट
या खुलवाओ करंट
चक्रवृद्धि इंटरेस्ट मिलेगा
हरपल तुम्हे अर्जेन्ट
हरपल तुम्हे अर्जेन्ट
एटीएम कार्ड मिलेगा
तुम्हे राधा नाम का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का।।


राधा नाम के बैंक प्रचारक
बन गए ‘चित्र-विचित्र’
बन गए ‘चित्र-विचित्र’
हर खाते पे मिले कमीशन
राधा नाम पवित्र
राधा नाम पवित्र
पागलपन मुफ्त मिलेगा
तुम्हे ब्रजधाम का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का।।

खुल गया बैंक राधा
रानी के नाम का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का
बैठा बनके मैनेजर
कान्हा नंदगांव का।।

हे मुरलीधर छलिया मोहन हम भी तुमको दिल दे बैठे लिरिक्स : He Murli Dhar Chhaliya Mohan Lyrics

Video thumbnail


हे मुरलीधर छलिया मोहन
हम भी तुमको दिल दे बैठे
गम पहले से ही कम तो ना थे
एक और मुसीबत ले बैठे
हे मुरलिधर छलिया मोहन
हम भी तुमको दिल दे बैठे।।

दिल कहता है तुम सुन्दर हो
आँखे कहती है दिखलाओ
तुम मिलते नही हो आकर के
हम कैसे कहे देखो ये बैठे
हे मुरलिधर छलिया मोहन
हम भी तुमको दिल दे बैठे।।

महिमा सुनके हैरान है हम
तुम मिल जाओ तो चैन मिले
मन खोज के भी तुम्हे पाता नही
तुम हो की उसी मन में बैठे
हे मुरलिधर छलिया मोहन
हम भी तुमको दिल दे बैठे।।

राजेश्वर राजाराम तुम्ही
प्रभु योगेशेवर घनश्याम तुम्ही
धनुधारी बने कभी मुरली बजा
यमुना तट निज जन में बैठे
हे मुरलिधर छलिया मोहन
हम भी तुमको दिल दे बैठे।।

हे मुरलीधर छलिया मोहन
हम भी तुमको दिल दे बैठे
गम पहले से ही कम तो ना थे
एक और मुसीबत ले बैठे
हे मुरलिधर छलिया मोहन
हम भी तुमको दिल दे बैठे।।

मेनू अपना बनाया तेरी मेहरबानियाँ भजन लिरिक्स

Video thumbnail


मेनू अपना बनाया
तेरी मेहरबानियाँ
मेनू चरणी लगाया
तेरी मेहरबानियाँ
मेहरबानियाँ तेरी मेहरबानियाँ
मेहरबानियाँ तेरी मेहरबानियाँ
मेनु अपना बनाया
तेरी मेहरबानियाँ।।

प्याला प्रेम वाला
जदो दा पिलाया ऐ
इना आँखा विच
तू ही ओ समाया है
रंग अपना चढ़ाया
तेरी मेहरबानियाँ
मेनु अपना बनाया
तेरी मेहरबानियाँ।।

झूठे जग तो किनारा
असि कित्ता ऐ
जदो मिल गया
सच्चा मन मीता ऐ
मेनू जग तो छुड़ाया
तेरी मेहरबानियाँ
मेनु अपना बनाया
तेरी मेहरबानियाँ।।

मन ले ‘चित्रविचित्र’
दा केहना ऐ
बण के पागल तेरे
चरणा विच रहना है
मेनू वृन्दावन बसाया
तेरी मेहरबानियाँ
मेनु अपना बनाया
तेरी मेहरबानियाँ।।

मेनू अपना बनाया
तेरी मेहरबानियाँ
मेनू चरणी लगाया
तेरी मेहरबानियाँ
मेहरबानियाँ तेरी मेहरबानियाँ
मेहरबानियाँ तेरी मेहरबानियाँ
मेनु अपना बनाया
तेरी मेहरबानियाँ।।

लाड़ली श्यामा किशोरी हमारी है भजन लिरिक्स

Video thumbnail


लाड़ली श्यामा किशोरी हमारी है
भोरी भारी अतिसुकुमारी प्यारी है
लाडली श्यामा किशोरी हमारी है।।

तीनो लोको पे है इनकी नजरेकरम
तीनो लोको पे है इनकी नजरेकरम
ये ही एक किरपा बरसाने वारी है
ये ही एक किरपा बरसाने वारी है
भोरी भारी अतिसुकुमारी प्यारी है
लाडली श्यामा किशोरी हमारी है।।

श्रष्टि का कण कण अधीन है श्यामा का
श्रष्टि का कण कण अधीन है श्यामा का
श्याम सुन्दर भी इन्ही के पुजारी है
श्याम सुन्दर भी इन्ही के पुजारी है
भोरी भारी अतिसुकुमारी प्यारी है
लाडली श्यामा किशोरी हमारी है।।

प्रेम ममता और करुणा की खान है
प्रेम ममता और करुणा की खान है
लाड़ली मेरी प्रेमाअवतारी है
लाड़ली मेरी प्रेमाअवतारी है
भोरी भारी अतिसुकुमारी प्यारी है
लाडली श्यामा किशोरी हमारी है।।

पल में ‘चित्र विचित्र’ को दिया आसरा
पल में ‘चित्र विचित्र’ को दिया आसरा
इनकी किरपा पे सदा बलिहारी है
इनकी किरपा पे सदा बलिहारी है
भोरी भारी अतिसुकुमारी प्यारी है
लाडली श्यामा किशोरी हमारी है।।

लाड़ली श्यामा किशोरी हमारी है
भोरी भारी अतिसुकुमारी प्यारी है
लाडली श्यामा किशोरी हमारी है।।

थाम लो मैं बिखर जाऊंगा मैं बिखर के किधर जाऊंगा लिरिक्स

Video thumbnail


थाम लो मैं बिखर जाऊंगा
मैं बिखर के किधर जाऊंगा।।

मुझको कोई शिकायत नही
तेरे बिन मुझको राहत नही
इश्क़ की हद गुजर जाऊंगा
मैं बिखर के किधर जाऊंगा
थामलों मैं बिखर जाऊंगा
मैं बिखर के किधर जाऊंगा।।

लागी तुमको पाने की लगन
रहूं हर पल तुम्ही में मगन
तुम जहाँ हो उधर जाऊंगा
मैं बिखर के किधर जाऊंगा
थामलों मैं बिखर जाऊंगा
मैं बिखर के किधर जाऊंगा।।

तुम हो ‘चित्र विचित्र’ के सजन
सूना सूना है तुम बिन जीवन
तुमको पाके संवर जाऊंगा
मैं बिखर के किधर जाऊंगा
थामलों मैं बिखर जाऊंगा
मैं बिखर के किधर जाऊंगा।।

मुझको ऐसे ना यूँ छोड़िए
मुख अपना ना यूँ मोड़िए
ना मिले तो मैं मर जाऊंगा
मैं बिखर के किधर जाऊंगा
थामलों मैं बिखर जाऊंगा
मैं बिखर के किधर जाऊंगा।।

थाम लो मैं बिखर जाऊंगा
मैं बिखर के किधर जाऊंगा।।

टिप्पणियाँ

Popular

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

 घूमर गीत राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने काजळ टिकी लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने लाडूङो लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने परदेशियाँ मत दीजो रे माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने राठोडा रे घर भल दीजो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हाने राठोडा री बोली प्यारी लागे ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ... इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बाईसा रा बीरा लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोलालहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारा सुसराजी तो दिल्ली रा राजवी सा म्हारा सासूजी ...

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी (वसंत पंचमी), 1970 को पिअखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डा चन्द्रपाल शर्मा आर एस एस डिग्री कालेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कालेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डा कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढाई में नहीं रमा, और उन्होंने बीच में ही वह पढाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्प्श्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया। पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो...

देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

 उठो धरा के अमर सपूतों -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी/देशभक्ति की कविता उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।1।। डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।2।। कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।3।। सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है। तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।4।। -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप/देशभक्ति कविता ऐ मेरे वतन के लोगो...

देशभक्ति कविताओं का कोश - भाग 2 | Deshbhakti Kavita Sangrah 2

 आज जीत की रात- गिरिजाकुमार माथुर/देशभक्ति कविता आज जीत की रात पहरुए! सावधान रहना खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना २ प्रथम चरण है नये स्वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मंथन से उठ आई पहली रत्न-हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन-मुक्ता-डोर क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना। ३ विषम शृंखलाएँ टूटी हैं खुली समस्त दिशाएँ आज प्रभंजन बनकर चलतीं युग-बंदिनी हवाएँ प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं यह सिमटी सीमाएँ आज पुराने सिंहासन की टूट रही प्रतिमाएँ उठता है तूफान, इंदु! तुम दीप्तिमान रहना। ४ ऊंची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है शत्रु हट गया, लेकिन उसकी छायाओं का डर है शोषण से है मृत समाज कमज़ोर हमारा घर है किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी यह विश्वास अमर है जन-गंगा में ज्वार, लहर तुम प्रवहमान रहना पहरुए! सावधान रहना।। गिरिजाकुमार माथुर   चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण,- सुमित्रानंदन पंत/देशभक्ति कविता १५ अगस्त १९४७ चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! नवभारत, फिर चीर युगों का तिमिर आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परि...

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

 खोय देत हो जीवन बिना काम के भजन करो कछु राम के / बुन्देली लोकगीत  खोय देत हो जीवन बिना काम के, भजन करो कछु राम के। जी बिन देह जरा न रुकती, चाहो अन्त समय में मुक्ती ऐसी करो जतन से जुक्ती, ध्यान करियों सबेरे न तो शाम के। भजन... लख चौरासी भटकत आये, मानुष देह कठिन से पाये, फिर भी माने न समुझायें, गलती चक्कर में फंसे बिना राम के। भजन... ईश्वर मालिक से मुंह फेरे, दिल से नाम कभऊं न टेरे, वन के नारि कुटुम्ब के चेरे, कोरी ममता में फंसे इते आन के। भजन... छोड़ो मात पिता और भ्राता, जो हैं तीन लोक के दाता, करियो उन ईश्वर से नाता, क्षमा करिहें अपराध अपना जान के। भजन... गगा को मान बड़ा भारी / बुन्देली लोकगीत  गंगा को मान बड़ा भारी, चलो बहनों मुक्ती सुधारी। तारन के लाने सहज में न आई, तप करके भागीरथ निकारी। चलो दीदी.... गंगा की धार शम्भू रोकी जटन में भोला शिवत्रिपुरारी। चलो दीदी.... तीरथ व्रत ऐसे चारों तरफ हैं गंगा की महिमा है न्यारी। चलो दीदी.... जावे के लाने कछु अड़चन नैयां दिन भर चले मोटर गाड़ी। चलो दीदी.... गंगा जी जावें परम गति पावें मन में विश्वास करो भारी। चलो दीदी.... ग...