सुहाग-कामण / 1 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Suhag-Kaman 1 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics
बनड़ी चली आपरी मायड़ रे पास, देओ म्हारी मायड़ अमर सुहाग।
ओरां ने देवां बाई पूड़ी हे बन्धाय, थाने कंवर बाई थाल भराय।
थाने कंवर बाई अमर सवाग।
पूडियां रो बांध्यो मांय ढुल-ढुल जाय थाल भर्यो।
झक झोला खाय, बुलायो बनड़ी रे अमर सवाग
बनड़ी चाली आपरी काक्यां रे पास,
औरां ने देवां बाई पूड़ी हे बन्धाय थाने कंवर बाई थाल भराय।
थाने कंवर बाई सरब सुहाग।
पूडियां रो बांध्यो मामियां ढुल-ढुल जाय थाल भर्यो।
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