जुवा-जुवी खेलने का गीत / 4 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Jua-Juvi Khelne Ka Geet 4 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics

कांकण डोरे खोलने का गीत

तने दूध दही से पाल्यो ले लाड़ा, डोरो नहीं खुले।
तन थलियां बैठकर खिलाई लाड़ी, डोरी नाहीं खुले।
तने लाडू देर पढ़ायो रे लाला, डोरो नाहीं खुले।
तने पापड़ देर पढ़ायो रे लाली डोरा नाहीं खुले।
जुआ जुई की गीत राया को जीत्यो रे, डेड़ा की हारी
डेड़ा की जीती रे, राया को हारो रे।



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