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कुछ भी बन बस कायर मत बन कविता नरेन्द्र शर्मा Kuch bhi ban bas kayar mat ban kavita



पण्डित नरेन्द्र शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के खुर्जा जिले के जहांगीरपुर नामक गाँव में 28 फरवरी 1913 में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षाशास्त्र और अंग्रेज़ीमें एम॰ए॰ किया। १९३४ में प्रयाग में 'अभ्युदय' पत्रिका का संपादन किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी स्वराज्य भवन में हिंदी अधिकारी रहे और gfhff बॉम्बे टाकीज़ बम्बई में गीत लिखे। उन्होंने फिल्मों में गीत लिखे, आकाशवाणी से भी संबंधित रहे और स्वतंत्र लेखन भी किया।




Kuch bhi ban bas kayar mat ban kavita
कुछ भी बन बस कायर मत बन / नरेन्द्र शर्मा

कुछ भी बन बस कायर मत बन,

ठोकर मार पटक मत माथा तेरी राह रोकते पाहन।

कुछ भी बन बस कायर मत बन।




युद्ध देही कहे जब पामर,

दे न दुहाई पीठ फेर कर

या तो जीत प्रीति के बल पर

या तेरा पथ चूमे तस्कर

प्रति हिंसा भी दुर्बलता है

पर कायरता अधिक अपावन

कुछ भी बन बस कायर मत बन।




ले-दे कर जीना क्या जीना

कब तक गम के आँसू पीना

मानवता ने सींचा तुझ को

बहा युगों तक खून-पसीना

कुछ न करेगा किया करेगा

रे मनुष्य बस कातर क्रंदन

कुछ भी बन बस कायर मत बन।




तेरी रक्षा का ना मोल है

पर तेरा मानव अमोल है

यह मिटता है वह बनता है

यही सत्य कि सही तोल है

अर्पण कर सर्वस्व मनुज को

न कर दुष्ट को आत्मसमर्पण

कुछ भी बन बस कायर मत बन।




29-11-1946

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