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Shaukat Thanvi ke Kisse Latife शौकत थानवी के क़िस्से

 वाह! आपकी तो बीवी है

शौकत थानवी Shaukat Thanvi ke Kisse Latife

शौकत थानवी बाग़-ओ-बहार तबीयत के मालिक थे। एक बार बीवी के साथ कराची जा रहे थे। जिस डिब्बे में उनकी सीट थी वो निचली थी। ऊपर की सीट पर एक मोटे ताज़े आदमी बिराजमान थे। शौकत साहब ने उठकर उन्हें ग़ौर से देखा फिर छत की तरफ़ देखकर कहा, “सुब्हान-अल्लाह क़ुदरत।”


वो आदमी बोला, “क्या मुझसे कुछ कहना है?”


शौकत ने कहा, “जी हाँ, आपकी नज़र में कोई लड़की है?”


“क्यों?”


“मैं उससे शादी करूँगा।” शौकत ने कहा।


“वाह, आपकी तो बीवी है।”


“सोचता हूँ जब आप नीचे उतरेंगे तो गिरेंगे ज़रूर और मेरी बीवी शहीद हो जाएगी। इसलिए मैं अभी से इंतिज़ाम कर रहा हूँ।”


शौकत के इस जवाब पर सारा डिब्बा हंस दिया। और सारे सफ़र में वो मोटे आदमी सीट से नीचे नहीं उतरे।



 

मलक-उल-मौत की इनायत

शौकत थानवी Shaukat Thanvi ke Kisse Latife

एक दफ़ा शौकत थानवी सख़्त बीमार पड़े। यहाँ तक कि उनके सर के सारे बाल झड़ गए। दोस्त अहबाब उनकी इयादत को पहुंचे और बातचीत के दौरान उनके गंजे सर को भी देखते रहे। सबको हैरान देखकर शौकत थानवी बोले,


“मलिक-उल-मौत आए थे। सूरत देखकर तरस आगया। बस सिर्फ़ सर पर एक चपत रसीदकर के चले गए।”



 

बारह सिंघा

शौकत थानवी Shaukat Thanvi ke Kisse Latife

पंजाब यूनीवर्सिटी के रजिस्ट्रार एस.पी. सिंघा के ग्यारह बच्चों के नाम का आख़िरी जुज़ सिंघा था। जब उनके बारहवाँ लड़का पैदा हुआ तो शौकत थानवी से मश्वरा किया कि इसका क्या नाम रखूँ। इस पर शौकत साहब ने बेसाख़्ता कहा,


“आप उसका नाम बारह सिंघा रख दीजिए।”



 

यूरोप को रवानगी और बीवी का ख़दशा

शौकत थानवी

शौकत थानवी यूरोप के लिए रवाना होने लगे तो उनके एक दोस्त ने पूछा,


“रवानगी कब होगी?”


शौकत ने कहा,


“क्या बताऊं, तुम्हारी भाबी ने परेशान कर रखा है। कहती है विलायत जाओगे तो तुम मेम ज़रूर लाओगे। हालाँकि मैंने क़सम खाकर कहा है कि अगर अपने लिए मेम लाया तो तुम्हारे लिए भी एक साहब ज़रूर लाऊँगा। लेकिन वो सुनती ही नहीं।”



 

पीराना-साली और अंग्रेज़ ख़ातून से शादी

शौकत थानवी Shaukat Thanvi ke Kisse Latife

अबुल असर हफ़ीज़ जालंधरी ने पीराना-साली में जब अंग्रेज़ ख़ातून से शादी के बारे में सोचा तो तज़बज़ुब के आलम में उन्होंने जब शौकत थानवी से मश्वरा किया तो शौकत ने कहा,


“हफ़ीज़ साहब, इससे क़ब्ल कि वो बेवा-ए-हफ़ीज़ बन जाए, आप शादी कर लें।”

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शौकत थानवी
जन्म2 फरवरी 1904
वृंदावन , मथुरा जिला , आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत , ब्रिटिश भारत
मृत4 मई 1963 (आयु 59)
लाहौर , पश्चिमी पाकिस्तान , पाकिस्तान
विश्राम स्थलमिआनी साहब का कब्रिस्तान, लाहौर , पाकिस्तान
पेशापत्रकार , निबंधकार , स्तंभकार , उपन्यासकार , लघु कथाकार , प्रसारक , नाटककार , हास्यकार और कवि
उल्लेखनीय कार्यशीश महल , सुदेशी रेल
उल्लेखनीय पुरस्कारपाकिस्तान के राष्ट्रपति से तमगा-ए-इम्तियाज़ (उत्कृष्टता पदक) पुरस्कार (1963)

 

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