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भल हर भल हरि भल तुअ कला खन / Bhal har bhal hari bhal tua kala khan Vidyapati

भल हर भल हरि भल तुअ कला खन, पित वसन खनहिं बघछाला।
खन पंचानन खन भुज चारी, खन शंकर, खन देव मुरारि।
खन गोकुल भए चराइअ गाय, खन भिखि मांगिए डमरू बजाए।
खन गोविंद भए लेअ महादान, खनहि भसम भरू कांख वो कान।
एक शरीर लेल दुई बास, खन बैकुंठ खनहिं कैलास।
भनई विद्यापति विपरित वानि, ओ नारायण ओ सुलपानि॥

यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं

 

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