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जन्म के गीत छत्तीसगढ़ी लोकगीत Chhatisgarhi Janm Geet Lokgeet

 जन्म के गीत-1 / छत्तीसगढ़ी

महला मां ठाढि बलमजी
अपन रनिया मनावत हो
रानी पीलो मधु-पीपर,
होरिल बर दूध आहै हो।
कइसे के पियऊँ करुरायवर
अउ झर कायर हो
कपूर बरन मोर दाँत
पीपर कइसे पियब हो
मधु पीपर नइ पीबे
त कर लेहूं दूसर बिहाव
पीपर के झार पहर भर
मधु के दुइ पहर हो
सउती के झार जनम भर
सेजरी बंटोतिन हो
कंचन कटोरा उठावब
पीलडूं मधु पीपर हो

जन्म के गीत-2 / छत्तीसगढ़ी

ननदी बोलयेंव उहू नइ आइस
ननदी हो हमार का करि लेहव।
बहिनी बलाके कांके मढ़ई बोन
हम छबीली सबे के काम पड़बोन।।
ननदोइ बोलयेंव उहू नइ आइस
भोटो बला के नरियर फोरा ले बोन
हम छबीली सबे के काम पड़बोन।।
जेठानी बोलायेंव उहू नइ आइस
जेठानी हो हमार का करि लेहव।
भौजी बला के, सोंहर गवाबोन
हम छबीली सबे के काम पड़बोन।।
जेठ जो बोलायेंव उहू नइ आइस
जेठ हो हमार का करिलेहव।
भाई बला के बन्दुक छुटबई लेबोन
हम छबीली सबे के काम पड़बोन।।
ससुर बोलायेंव उहू नइ आइस
ससुर हो हमार का करिलेहव।
बापे बला के नाम धरइ ले बोन
हम छबीली सबे के काम पड़बोन।।
सासे बोलायेंव उहू नइ आइस
सासे हो हमार का करिलेहव।
दाई बला के टुठू बधवइबोन
हम छबीली सबे के काम पड़िबोन।।

जन्म के गीत-3 / छत्तीसगढ़ी

पहली गनेश पद धावों
मैं चरन गभावों
ललना विघन हरन जन नायक
सोहर के पद ल गावत हो
एक धन अंगिया के पातर
दुसर हे गर्भवती ओ
ललना अंगना में रेंगत लजाय
सास ल बलावन लागे हो
ननद मोर ओसरिया में ओ
ललना, र्तृया मोर सूत है महल में
मैं कैसे के जगवंव वो
झपकि के चढ़ों में अटरिया
खिरकी के लागू लेके ओ
ललना, छोटका देवर निरमोहिला
बंसी ल बजावत हवै ओ
मन मन गुने रानी देवकी
मन मं विचारन लागे ओ
ललना ऐही गरभ मैं कैसे
वचइ लेत्यौं ओ
सात पुत्र राम हर दिये
सबो ल कंस हर ले लिस औ
ललना ऐही गरभ अवतारे
मैं कैसे बचइ लेत्यौं औ
धर ले निकरे जसोदा रानी
मोर सुभ दिन सावन ओ
ललना, चलत हवै जमुना असनाने
सात सखी आगू सात सखी पीछू ओ
सोने के धइला मूड़ मं लिये
रेसम सूत गूड़री हे ओ
ललना, चलत है जमुना पानी
सात सखी आगू सात सखी पीछू ओ
कोनो सखी हाथ पांव छुए
कोनो सखी मुँह धौवै ओ
कोनो जमुना पार देखै
देवकी, रोवत हवै ओ
धेरि-धेरि देखै रानी जसोदा
मन में विचारन लागे ओ
कैसे के नहकों जमुना पारे
देवकी ल समझा आत्यों ओ
न तो दिखे, घाट घठौना
नइ दिखै नवा डोंगा वो
ललना, कैसे नहकों जमुना पारे
जमुना, ल नहकि के ओ
मर रो तें मत रो देवकी
मैं तोला समझावत हैं वो
ललना, कैसे विपत तोला होए
काहे दुख रोवत हवस ओ
कोन तोर सखा पुर में बसे
तोर कोन धर दुरिहा है ओ
ललना कोन तोर सइयां गए परदेसे
तैं काहे दुख रोवत हवस ओ
न तो मोर सखा पुर में बसै
न तो मोर धर दुरिहा ओ
न तो मोर र्तृया गए परदेसे
गरभ के दुख ला रोवत हवौं वो
सात पुत्र राम हर दिये
सबेल कंस हर लिस वो
ललना आठे गरभ अवतारे
मैं कैसे बचइले बौं बो
चुप रह तै चुप रह देवकी
मैं तोला समझावत हावों ओ
मोरे गरभ तोला देहौं
तोर ला बचाइ लेहौं वो
नून अऊ तेल के उधारी
पैसा कौड़ी के लेनी देनी ओ
बहिनी कोख के उधारी कैसे हो है
मैं कैसे धीरज धरौं ओ
एक मोर साखी है चन्दा
दुसर सुरज भाइ ओ
ललना, साखी है चन्दा भाइ
सुन ले देवकी रानी ओ
ऐसे करार कैसे बाधौं
धीरज धरौं ओ
ललना देवकी जैसे रामनामे
तुही ए गरभ ल उबारब ओ।
पहिलो महीना देवकी ल होवे
दुसर महीना होवे ओ
ललना, तिसर महीना देवकी ल होगे
तब मन सकुचावय हो
चार महीना देवकी ल होगे
तब गरभ जना परय हो
ललना, पिवर मुंह ड्डलड्डल दिखे
तब अठौ अंग पिवरा दिखे ओ
पांच महीना देवकी ल होगे
तब सास ह पुछन लागे ओ
देवकी ह पेट अवतारे
दुख-सुख बतावरन लागे ओ
छठे महीना देवकी ल होंगे
तब ननद हंस के कहय ओ
होतिस भतिजा वा अवतारे
तब सुमंगल गात्यों ओ
सात महीना देवकी ल होंगे
तब सास परिखन लागे हो
ज्योंनी अंग मोर फरकत हे
बेटवा के लच्छन हवै ओ
आठ महीना देवकी ल होगे
तब आठों अंग भरि गए ओ
कैसे के लुगरा सम्हारौं
दरद व्याकुल करे हो
नव दस महीना देवकी ल होंगे
तब सुइन ल बला देवै ओ
ललना, उठिगे पसुरी-पसुरी के पीरा
दरद में वियाकूल भये हो
भादो के रतिहा निसि अंधेरिया
पानी बरसन लागे ओ
ललना, बाहर मं बिजुरी चमके
गरजना करन लागै ओ

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