'उसने कहा था' को याद करते हुए / कुमार अनुपम Usne Kaha tha ko Yaad Karte Hue Kavita

 पानी पर लिखा

एक ने संदेश

दूसरे ने ठीक-ठीक पढ़ा

समझ लिया

गढ़ा नया वाक्य

नयी लिपि

नयी भाषा का जैसे आविष्कार किया


दौर की हवा कुल हवा

से एक की साँसों की हवा

को चुम्बन में चुना

होंठों पर सजा लिया


प्रेम में

उन पर

जैसे सच साबित हुए

घटिया फ़िल्मों के गाने

बहाने भी

कितने विश्वसनीय लगे


प्रेम में

चुना क्या शब्द कोई एक

नया वाक्य नई लिपि नई भाषा

महसूस सका?

पूछूँ जो कविता से- "तेरी कुड़माई हो गई?"-

- "धत्‌" -कहे और भाग जाये ऐसे

कि लगे

सिमट आई है और... और पास।

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