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प्रेरक प्रसंग : कहानियां / Motivational Story Hindi

पृष्ठ में भिन्न भिन्न लोगों और विभूतियों के कुछ लोकप्रिय प्रेरक प्रसंग / मोटिवेशनल स्टोरी  दिए गए हैं जो बच्चों के साथ साथ उनसे अधिक आयु के वर्ग को भी सम्मोहित करेंगे एवं जीवन में सकारात्मक , धैर्यता और अन्य गुणों को संजोने के लिए प्रेरित करेंगे | 

महात्मा गांधी के प्रेरक प्रसंग / प्रेरक कहानियां


प्रेरक प्रसंग / महात्मा गांधी - वास्तविक पश्चाताप: लोक-धन का हिसाब और उत्तरदायित्व
प्रेरक प्रसंग / महात्मा गांधी - अपमान पर धैर्य: थूक की घटना से दंगों की शांति
प्रेरक प्रसंग / महात्मा गांधी - गुरुवायूर संकल्प: हरिजन प्रवेश की ऐतिहासिक स्वीकृति
प्रेरक प्रसंग / महात्मा गांधी - चरखा का अर्थ: ग्रामोद्योग और सहभागी विकास
प्रेरक प्रसंग / महात्मा गांधी - आदर्शों का अनुकरण ही सम्मान
प्रेरक प्रसंग / महात्मा गांधी - अपना काम स्वयं: सूत के तारों से सीखा पाठ
प्रेरक प्रसंग / महात्मा गांधी → समय धन है: साइकिल से समय-पालन का पाठ
प्रेरक प्रसंग / महात्मा गांधी - करुणा का स्पर्श: बिच्छू-दंशित कैदी की सेवा

प्रेरक प्रसंग / महात्मा गांधी - ताम्बे का सिक्का: त्याग का असली मूल्य
प्रेरक प्रसंग / महात्मा गांधी - भय पर विजय: राम-नाम का सहारा

बुद्ध के प्रेरक प्रसंग / प्रेरक कहानियां 



स्वामी विवेकानंद के प्रेरक प्रसंग / प्रेरक कहानियां



प्रेरक प्रसंग / स्वामी विवेकानंद - सत्यनिष्ठा और एकाग्रता: कक्षा का प्रसंग
प्रेरक प्रसंग / स्वामी विवेकानंद - देने का आनंद: भूखे बच्चों को रोटियाँ
प्रेरक प्रसंग / स्वामी विवेकानंद - निर्भीकता का तेज: पागल सांड के सामने धैर्य
प्रेरक प्रसंग / स्वामी विवेकानंद - आत्मबल और आधुनिकता: उठो, जागो, लक्ष्य प्राप्त करो
प्रेरक प्रसंग / स्वामी विवेकानंद - मातृत्व का उत्तर: विवाह निवेदन पर उत्कृष्ट समाधान


विनोबा भावे के प्रेरक प्रसंग / प्रेरक कहानियां


प्रेरक प्रसंग / विनोबा भावे - भूदान का त्याग: हाथ में मिट्टी भी नहीं
प्रेरक प्रसंग / विनोबा भावे - प्रेम की शक्ति: जमींदार का मन परिवर्तन
प्रेरक प्रसंग / विनोबा भावे - अडिग भक्ति: फकीर और सौ रुपये की परीक्षा
प्रेरक प्रसंग / विनोबा भावे - आसक्ति छोड़ो: ‘खंभे ने पकड़ा’ रूपक से सीख
प्रेरक प्रसंग / विनोबा भावे - योजना में पक्षपात - गरीबों के पक्ष में
संत की महानता / विनोबा भावे - छोटी झोपड़ी, बड़ा हृदय: ‘सोने से खड़े होने’ तक
अपरिग्रही संन्यासी / विनोबा भावे - सच्चा अपरिग्रह: कुत्ते से सीखा पाठ
भगवान के बेटों को न सताओ / विनोबा भावे - सॉल से पॉल: ईसा का प्रश्न और रूपांतरण
श्रद्धा नहीं तो बेड़ा गर्क / विनोबा भावे - एक-निष्ठ श्रद्धा से पार उतरो
पूर्णमद: पूर्णमिदम् / विनोबा भावे - हर इकाई में पूर्णता: छोटे लड्डू का बड़ा मन्त्र


सरदार पटेल के प्रेरक प्रसंग / प्रेरक कहानियां



लाल बहादुर शास्त्री के प्रेरक प्रसंग / प्रेरक कहानियां


डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रेरक प्रसंग / प्रेरक कहानियां

प्रेरक प्रसंग / डॉ. राजेंद्र प्रसाद - विनम्रता का शिखर: राष्ट्रपति का ‘तुलसी, मुझे माफ कर दो’
प्रेरक प्रसंग / डॉ. राजेंद्र प्रसाद - ‘तुम्हारी सिगरेट, तुम्हारा धुआँ’: मर्यादा का सटीक उत्तर
प्रेरक प्रसंग / डॉ. राजेंद्र प्रसाद - पहचान से पहले व्यक्तित्व: मदरसा-रजिस्टर और टॉपर
प्रेरक प्रसंग / डॉ. राजेंद्र प्रसाद - देश पहले, करियर बाद: वकालत छोड़ने का निश्चय

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 घूमर गीत राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने काजळ टिकी लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने लाडूङो लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने परदेशियाँ मत दीजो रे माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने राठोडा रे घर भल दीजो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हाने राठोडा री बोली प्यारी लागे ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ... इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बाईसा रा बीरा लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोलालहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारा सुसराजी तो दिल्ली रा राजवी सा म्हारा सासूजी ...

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी (वसंत पंचमी), 1970 को पिअखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डा चन्द्रपाल शर्मा आर एस एस डिग्री कालेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कालेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डा कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढाई में नहीं रमा, और उन्होंने बीच में ही वह पढाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्प्श्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया। पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो...

देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

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