श्री पुष्पदंत जी चालीसा – सम्पूर्ण पाठ हिंदी में (Lyrics व Video सहित)

श्री पुष्पदंत जी चालीसा 🎬 वीडियो देखें

श्री पुष्पदंत जी चालीसा एक अत्यंत पावन एवं भक्तिभाव से परिपूर्ण स्तुति है। श्रद्धालु प्रतिदिन इस चालीसा का पाठ करके मन की शांति, सुख-समृद्धि और सभी कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। नीचे दी गई सम्पूर्ण चालीसा को ध्यानपूर्वक पढ़ें और साथ ही ऊपर दिए गए बटन पर क्लिक करके इसका भक्ति वीडियो भी देखें।

दुःख से तृप्त मरुस्थल भाव में, सघन वृक्ष सम छायाकार ।
पुष्पदन्त पद छत्र छाव में, हम आश्रय पावें सुखकार ।।

जम्बू द्वीप के भरत क्षेत्र में, काकंदी नामक नगरी में ।
राज्य करें सुग्रीव बलधारी, जयराम रानी थी प्यारी ।।

नवमी फाल्गुन कृष्ण बखानी, षोडश स्वपन देखती रानी ।
सूत तीर्थंकर गर्भ में आये, गर्भ कल्याणक देव मनाये ।।

प्रतिपदा मंगसिर उजियारी, जन्मे पुष्पदंत हितकारी ।
जन्मोत्सव की शोभा न्यारी, स्वर्गपुरी सम नगरी प्यारी ।।

आयु थी दो लक्ष पूर्व की, ऊंचाई शत एक धनुष की ।
थामी जब राज्य बागडोर, क्षेत्र वृद्धि हुई चहुँ और ।।

इच्छाए थी उनकी सिमित, मित्र प्रभु के हुए असीमित ।
एक दिन उल्कापात देख कर, दृष्टिपात किया जीवन पर ।।

स्थिर कोई पदार्थ ना जग में, मिले ना सुख किंचित भवमग में ।
ब्रह्मलोक से सुरगन आये, जिनवर का वैराग्य बढ़ाये ।।

सुमति पुत्र को देकर राज, शिविका में प्रभु गए विराज ।
पुष्पक वन में गए हितकार, दीक्षा ली संग भूप हजार ।।

गए शैलपुर दो दिन बाद, हुआ आहार वह निराबाध ।
पात्रदान से हर्षित हो कर, पंचाश्चार्य करे सुर आकर।।

प्रभुवर गए लौट उपवन को, तत्पर हुए कर्म छेदन को ।
लगी समाधि नाग वृक्ष ताल, केवल ज्ञान उपाया निर्मल ।।

इन्द्राज्ञा से समोशरण की, धनपति ने आकर रचना की ।
दिव्या देशना होती प्रभु की, ज्ञान पिपासा मिति जगत की ।।

अनुप्रेक्षा द्वादश समझाई, धर्म स्वरुप विचारों भाई ।
शुक्ल ध्यान की महिमा गाई, शुक्ल ध्यान से हो शिवराई ।।

चारो भेद सहित धारो मन, मोक्षमहल को पहुचो तत्क्षण ।
मोक्ष मार्ग दिखाया परभू ने, हर्षित हुए सकल जन मन में ।।

इंद्र करे प्रार्थना जोड़ कर, सुखद विहार हुआ श्री जिनवर ।
गए अंत में शिखर सम्मेद, ध्यान में लीन हुए निरखेद ।।

शुक्ल ध्यान से किया कर्म क्षय, संध्या समय पाया पद अक्षय ।
अश्विन अष्टमी शुक्ल महान, मोक्ष कल्याणक करे सुख आन ।।

सुप्रभ कूट की करते पूजा, सुविधि नाथ है नाम दूजा ।
मगरमच्छ हैं लक्षण प्रभु का, मंगलमय था जीवन उनका ।।

शिखर सम्मेद में भारी अतिशय, प्रभु प्रतिमा हैं चमत्कारमय ।
कलियुग में भी आते देव, प्रतिदिन नृत्य करें स्वयमेव ।।

घुंघरू की झंकार गूंजती, सबके मन को मॊहित करती ।
ध्वनि सुनी हमने कानो से, पूजा की बहु उपमानो से ।।
हमको हैं ये दृढ श्रद्धान, भक्ति से पाए शिवथान ।
भक्ति में शक्ति हैं न्यारी, राह दिखाए करुनाधारी ।।

पुष्पदंत गुणगान से, निश्चित हो कल्याण ।
अरुणा अनुक्रम से मिले, अंतिम पद निर्वाण ।।

श्री पुष्पदंत जी चालीसा पाठ का महत्व

नियमित रूप से इस चालीसा के पाठ से भक्तों के दुःख-दारिद्र दूर होते हैं, मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन पढ़ें।

सभी जैन चालीसा एक साथ पढ़ने के लिए हमारा संग्रह पेज देखें: जैन चालीसा संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3