श्री विमलनाथ जी चालीसा – सम्पूर्ण पाठ हिंदी में (Lyrics व Video सहित)
श्री विमलनाथ जी चालीसा 🎬 वीडियो देखें
श्री विमलनाथ जी चालीसा एक अत्यंत पावन एवं भक्तिभाव से परिपूर्ण स्तुति है। श्रद्धालु प्रतिदिन इस चालीसा का पाठ करके मन की शांति, सुख-समृद्धि और सभी कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। नीचे दी गई सम्पूर्ण चालीसा को ध्यानपूर्वक पढ़ें और साथ ही ऊपर दिए गए बटन पर क्लिक करके इसका भक्ति वीडियो भी देखें।
सिद्ध अनंतानंत नमन कर, सरस्वती को मन में ध्याय ।
विमल प्रभु की विमल भक्ति कर, चरण कमल को शीश नवाय ।।
जय श्री विमलनाथ विमलेश, आठो कर्म किये निःशेष ।
कृत वर्मा के राज दुलारे, रानी जयश्यामा के प्यारे ।।
मंगलिक शुभ सपने सारे, जगजननी ने देखे न्यारे ।
शुक्ल चतुर्थी माघ मास की, जन्म जयंती विमलनाथ की ।।
जन्मोत्सव देवों ने मनाया, विमलप्रभु शुभ नाम धराया ।
मेरु पर अभिषेक कराया, गंधोदक श्रद्धा से लगाया ।।
वस्त्राभूषण दिव्य पहनाकर, मात पिता को सौपा आकर ।
साठ लाख वर्षायु प्रभु की, अवगाहना थी साठ धनुष की ।।
कंचन जैसी छवि प्रभु तन की, महिमा कैसे गाऊ में उनकी ।
बचपन बिता, यौवन आया, पिता ने राजतिलक करवाया ।।
चयन करो सुन्दर वधुओ का, आयोजन किया शुभ विवाह का ।
एक दिन देखि ओस घास पर, हिमकण देखे नयन प्रितीभर ।।
हुआ संसर्ग सूर्य रश्मि से, लुप्त हुए सब मोती जैसे ।
हो विश्वास प्रभु को कैसे, खड़े रहे वे चित्रलिखित से ।।
क्षणभंगुर हैं ये संसार, एक धर्म ही हैं बस सार ।
वैराग्य ह्रदय में समाया, छोड़े क्रोध मान और माया ।।
घर पहुचे अनमने से होकर, राजपाठ निज सूत को देकर ।
देवभई शिविका पर चढ़कर, गए सहेतुक वन में जिनवर ।।
माघ मास चतुर्थी कारी, नमः सिद्ध कह दीक्षा धारी ।
रचना समोशरण हितकार, दिव्य देशना हुई हितकार ।।
उपशम करके मिथ्यात्व का, अनुभव करलो निज आतम का ।
मिथ्यातम का होय निवारण, मिटे संसार भ्रमण का कारण ।।
बिन सम्यक्त्व के जप तप पूजन, निष्फल हैं सारे फल अर्चन ।
विषफल हैं विषयभोग सब, इनको त्यागो हेय जान अब ।।
द्रव्य भाव नो कमोदी से, भिन्न है आतम देव सभी से ।
निश्च्य करके निज आतम का, ध्यान करो तुम परमातम का ।।
ऐसी प्यारी हित की वाणी, सुनकर सुखी हुए सब प्राणी ।
दूर दूर तक हुआ विहार, किया सभी ने आत्मोद्धार ।।
मंदर आदि पचपन गणधर, अडसठ सहस दिगंबर मुनिवर ।
उम्र रही जब तीस दिनों की, जा पहुचे सम्मेदशिखर जी ।।
हुआ बाह्य वैभव परिहार, शेप कर्म बंधन निखार ।
आवागमन का कर संहार, प्रभु ने पाया मोक्षागार ।।
षष्ठी कृष्ण मास आषाढ़, देव करें जिन भक्ति प्रगाढ़ ।
सुवीर कूट पूजे मन लाय, निर्वाणोत्सव करें हर्षाय ।।
जो भावी विमल प्रभु को ध्यावे, वे सब मनवांछित फल पावे ।
अरुणा करती विमल स्तवन, ढीले हो जावे भव बंधन ।।
श्री विमलनाथ जी चालीसा पाठ का महत्व
नियमित रूप से इस चालीसा के पाठ से भक्तों के दुःख-दारिद्र दूर होते हैं, मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन पढ़ें।
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