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धान का गीत / 2 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Dhan Ka Geet 2 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics

चालो सखी आपां मूंग सोवा, मूंग सोवा सुसराजी रे आंगणे।
मूंग सोवा ने गीत गावां, लाडली ने परणावस्यां।
चालो सखी आपां चावल लेवां चावल लेवा सुसराजी रे आंगणे।
चावल सोवा ने गीत गावां लाडली ने परणावस्यां।
चालो सखी आपां गेहूं लेवा, गेहूं लेवां सुसराजी रे आंगणे।
गेहूं लेवां ने गीत गांवा बाई… ने परणावस्यां।

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