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बना के गीत / 24 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Bana Ke Geet 24 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics

घोड़ी मारी घणी य सरूप, दौलतगढ़ से ऊतरी जी,
दादा सा मांने घोड़ी ले द्यो मोल, जावांला समन्दर सासर जी,
जास्या-जास्या साजनियां री पोल लाडी तो ल्यास्या रूप की जी,
बनो म्हारो घणो य सरूप, अंधेरा घर में दिवाली जी,
बनी मारी घणी य सरूप आभा तो घर की बीजली जी।

बना के गीत / 25 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Bana Ke Geet 25 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics

बना के गीत / 26 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Bana Ke Geet 26 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics

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