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बड़ अजगुत देखल तोर / Bar ajagut dekhal tor Vidyapati

गौरा तोर अंगना !

बर अजगुत देखल तोर अंगना,
एक दिस बाघ सिंह करे हुलना,
दोसर बरद छैन्ह सेहो बौना .
हे गौरा तोर अंगना

पैंच उधार माँगे गेलौं अंगना,
सम्पति मध्य देखल भांग घोटना.
हे गौरा तोर अंगना !

खेती न पथारि शिव गुजर कोना ,
मंगनी के आस छैन्ह बरसों दिना.
हे गौरा तोर अंगना !

कार्तिक गणपति दुई चेंगना,
एक चढथि मोर एक मुसना.
हे गौर तोर …..

भनहि विद्यापति सुनु उगना,
दरिद्र हरण करू धइल सरना.

यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
 

 

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