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दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे भजन / Bhajan Darshan Do Ghanshyam Nath Mori Ankhiyan Pyasi Re Bhajan

 

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे ॥

मंदिर मंदिर मूरत तेरी फिर भी न दीखे सूरत तेरी ।
युग बीते ना आई मिलन की पूरनमासी रे ॥
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरि अँखियाँ प्यासी रे ॥

द्वार दया का जब तू खोले पंचम सुर में गूंगा बोले ।
अंधा देखे लंगड़ा चल कर पँहुचे काशी रे ॥
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरि अँखियाँ प्यासी रे ॥

पानी पी कर प्यास बुझाऊँ नैनन को कैसे समजाऊँ ।
आँख मिचौली छोड़ो अब तो घट घट वासी रे ॥
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरि अँखियाँ प्यासी रे ॥ 

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