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जग असार में सार रसना हरि-हरि बोल बिन्दु जी भजन

  Jag Asar Mein SarRasna Hari-Hari Bol Bindu Ji Bhajan

जग असार में सार रसना हरि-हरि बोल।
यह तन है झिंझरी नेवईया,
केवल है हरि-नाम खेवईया।
हो जा भव से पार॥ रसना हरि-हरि बोल।
अपने तन की बीन बना ले,
प्रेम स्वरों के तार चढ़ा ले।
राम नाम झनकार॥ रसना हरि-हरि बोल।
जीवन कर्ज लिया हिया तूने,
चुकता कुछ न किया है तूने।
ऋण का भार उतार॥ रसना हरि-हरि बोल।
अधिक नहीं कुछ-कुछ कर ले तू,
‘बिन्दु’ बिन्दु से घट भर ले तू।
भरले धन भंडार॥ रसना हरि-हरि बोल। 

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