कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

जय जगपति जय जनपति रघुकुलपति राम बिन्दु जी भजन

 Bhajan Jai Jagpati JaiJanpati Raghukulapati Ram Bindu Ji Bhajan

जय जगपति, जय जनपति, रघुकुलपति राम।
शोभित श्रीसिय समेत, छविधर अभिराम॥
जय कृपाल, प्रणतपाल, दायक विश्राम।
घन सम तन द्युति ललाम, सुगति शांति धाम॥
भूमि भार, हार्न हार, जय अंनत नाम।
त्रिभुवन विख्यात विमल पावन गुण ग्राम॥
नेति नेति गावत ऋग, यजु, अथर्व, साम।
पूर्ण ‘बिन्दु’ पूर्ण सिन्धु परम पूर्ण काम॥ 

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *