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जनम सब बातन में बित गयो रे सूरदास भजन / Janam Sab Batan Mein BitGayore Surdas Bhajan

 

जनम सब बातनमें बित गयोरे ॥ध्रु०॥
बार बरस गये लडकाई । बसे जोवन भयो ।
त्रिश बरस मायाके कारन देश बिदेश गयो ॥१॥
चालीस अंदर राजकुं पायो बढे लोभ नित नयो ।
सुख संपत मायाके कारण ऐसे चलत गयो ॥ जन० ॥२॥
सुकी त्वचा कमर भई ढिली, ए सब ठाठ भयो ।
बेटा बहुवर कह्यो न माने बुड ना शठजीहू भयो ॥ जन० ॥३॥
ना हरी भजना ना गुरु सेवा ना कछु दान दियो ।
सूरदास मिथ्या तन खोवत जब ये जमही आन मिल्यो ॥ जन०॥४॥



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