जो उस साँवले को सदा ढूंढता है बिन्दु जी भजन
Bhajan Jo Us Sanwale Ko SadaDhundta Hai Bindu Ji Bhajan
जो उस साँवले को सदा ढूँढता है।
उसे एक दिन साँवला ढूँढता है॥
जिसे ढूँढने का अमल पड़ चुका है।
वो इसे ढूँढने में मज़ा ढूँढता है॥
अरे दिल जिसे कुल जहाँ ढूँढता है।
वो मुझमें है फिर तू कहाँ ढूँढता है॥
मिला उसको जो दिल मिला ढूँढता है।
जुदा उससे है जो जुदा ढूँढता है॥
जो पूछो पतित ‘बिन्दु’ क्या ढूँढता है?
पतित-बन्धु जी का पता ढूँढता है॥
bhajan, bhajan lyrics, bhajan lyrics in hindi, bhajan sangrah, bhajan-pad-mishrit, Bindu Ji Rachna, prasidh bhajan
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें