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तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर मीराबाई भजन / Bhajan Tank Hari Chitavau Ji Mori Or Meerabai Bhajan

 

तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर।

हम चितवत तुम चितवत नाहीं
           मन के बड़े कठोर।

मेरे आसा चितनि तुम्हरी
           और न दूजी ठौर।

तुमसे हमकूं एक हो जी
         हम-सी लाख करोर॥

कब की ठाड़ी अरज करत हूं
         अरज करत भै भोर।

मीरा के प्रभु हरि अबिनासी
           देस्यूं प्राण अकोर॥ 

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