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चोआ चानन अंग लगाओल कामीनि कायल किंशगार / Choa chanan ang lagaol kamini kayal kinshagar Vidyapati

चोआ चानन अंग लगाओल कामीनि कायल किंशगार
जे दिन मोहन मधउपुर गेलाह से दिन मास अखाढ़ रे कन्हैया के मनाय ने दीप…..
उधो बारि रे बयस बीतल जाय
हे कन्हैया के मनाय ने दीप…..
एक त गोरी बारी बयसिया
दोसर पीया परदेशिया
तेसर बून्द झलामलि बरसै
साबन अधिक कलेश
हे कन्हैया के मनाय ने दीप…..
भादब हे सखी मरम भयाबन
दोसर राति अन्हार
लाका लौके बीजुरी चमके
ककरा मड़ैया हैब ठाढ़
हे कन्हैया के मनाय ने दीप…..
आसिन हे सखि आस लगाओल
आस ने पुरल हमार
आसो जे पुरलन्हि कुब्जी सौतिनियाँ के
जे पाहुन रखल हमार
हे कन्हैया के मनाय ने दीप…..
कातिक हे सखी पर्व लगत है
सब सखी गंगास्नान
सब सखी मीली गंगा नहाबीय
बीना पीया पर्व उदास
हे कन्हैया के मनाय ने दीप…..
अगहन हे सखी सारी लबीय गेल
लबि गेल लोचन मोर
चिदई-चुनमुन सुखहिं खेपय
हम धनी बीरहा के मात
हे कन्हैया के मनाय ने दीप…..
पुंसहिं हे सखी ओस खसथु हैं
भीजी गेल लाम्बी केस
सब रे सखी मीली सीरक भरेलऊँ
बीनु पीया जारो ने जाय
हे कन्हैया के मनाय ने दीप…..
चैत हे सखी बेली फुलि गेल
फुलि गेल कुसुम गुलाब
ओहि फूलबा के हार गुथबितऊँ
मेजितऊँ पहुँजी के देस
हे कन्हैया के मनाय ने दीप…..
बैसाख हे सखी गरमी लगतु हैं
सब सखी बंगला छेबाय
सब के सखी सब बंगला छबाइहो
बीनु पीया बंगला उदास
हे कन्हैया के मनाय ने दीप…..
जेठ हे सखी भेंट भय गेल
पुरि गेल बारह मास
हे कन्हैया के मनाय ने दीप…..

यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
 

 

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