कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

घनश्याम ये तुझपर मेरा मस्ताना हुआ दिल बिन्दु जी भजन

  Ghanshyam Ye TujhparMera Mastana Hua Dil Bindu Ji Bhajan  

घनश्याम ये तुझपर मेरा मस्ताना हुआ दिल,
अपना था अब तक वहाँ बेगाना हुआ दिल।
जिस घर में था घर अपना सजाया था जिसे खूब,
सब ख़्वाहिशें उसकी लुटी विराना हुआ दिल।
इक सांस ली जो तूने तो दुनिया ही बदल दी,
पहले तो था काबा वही बुतखाना हुआ दिल।
तेरी मय उल्फ़त के जो पीने का हुआ शौक,
तो ज़िस्म ये शीशा हुआ पैमाना हुआ दिल। 

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *