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हरी के मोहनी मुरतीया में मोन लागल हे सखी / Hari ke mohni murtiya mein mon lagal he sakhi Vidyapati

हरी के मोहनी मुरतीया में मोन लागल हे सखी
छाती छबि में भेल विभोर
जहिना बिलखथि चन्द्र-चकोर
हमरा जुलमी नजरिया केलक पागल हे सखी
हरी के मोहनी मुरतीया में मोन लागल हे सखी
मोहन मृदु-मृदु मुस्कान
मुख लागल मृदु बान
कारी केसिया में अंखियां ओझराएल हे सखई
हरी के मोहनी मुरतीया में मोन लागल हे सखी
सोचन कोमल कुमल समान
जहिना नील गगन केर तान
कारी केसिया में अंखिया ओझरायल हे सखी
हरी के मोहनी मुरतीया में मोन लागल हे सखी

यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
 

 

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