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हे जननी आहाँ जन्म सुफल करु / Hey janani aahan janm suphal karu Vidyapati

हे जननी आहाँ जन्म सुफल करु
पूजा करब हे अम्बे
जशोदा-नन्दिनि त्रिभुवन वन्दिनि
असुर निकन्दनि हे देबी
हे जननी…..
पूजा करब…..
पुष्प-कमल पर चरण बिराजै
माया दृष्टि करु हे देबी
हे जननी…..
पूजा करब…..
आँचर पसारि हम पुत्र मंगै छी
आब ध्यान दिय हे अम्बे
हे जननी…..
पूजा करब हे देबी

यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
 

 

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