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कते हे दूर गुरु फुलवाड़ी धनी धरमदास भजन / Kate He Door Guru Phulwadi Dhani Dharamdas Bhajan

 

॥झूमर॥

कते हे दूर गुरु फुलवाड़ी,
हे गमक आवै केवड़ा के॥टेक॥
पाँच सखी मिली गेलौं फुलवाड़ी,
हे गमक आवै केवड़ा के॥1॥
इके हे हाथ फूल अलगावै,
हे गमक आवै केवड़ा के॥2॥
फुलवा जे लोढ़ि-लोढ़ि भरलौं चंगेरिया,
हे गमक आवै केवड़ा के॥3॥
संगहू के सखी सब दूर निकललै,
हे गमक आवै केवड़ा के॥4॥
आजू के बटिया लागै छै वियान,
हे गमक आवै केवड़ा के॥5॥
घोड़वा चढ़ल आवै सतगुरु साहब,
हे गमक आवै केवड़ा के॥6॥
धर्मदास यह अलख झूमरा गावै,
हे गमक आवै केवड़ा के॥7॥
लियहो गुरु शरण लगाय,
हे गमक आवै केवड़ा के॥8॥

सुतली मैं रहली अपना धनी धरमदास भजन / Sutli Main Rahli Apna Dhani Dharamdas Bhajan

कौने देलकै काठो के कंठी धनी धरमदास भजन / भजन Kaune Delkai Dhani Dharmdas Bhajan / Bhajan 

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