कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

केत्ते गये जखमार भजन बिना सूरदास भजन / Kette Gaye Jakhmaar Bhajan Bina Surdas Bhajan

 

केत्ते गये जखमार भजनबिना केत्ते गये० ॥ध्रु०॥
प्रभाते उठी नावत धोवत पालत है आचार ॥ भज०॥१॥
दया धर्मको नाम न जाण्यो ऐसो प्रेत चंडाल ॥ भज०॥२॥
आप डुबे औरनकूं डुबाये चले लोभकी लार ॥ भज०॥३॥
माला छापा तिलक बनायो ठग खायो संसार ॥ भज०॥४॥
सूरदास भगवंत भजन बिना पडे नर्कके द्वार ॥ भज०॥५॥ 

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *