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लाभ कहा कंचन तन पाये ललित किशोरी भजन

   Laabh Kaha Kanchan Tan Paaye LalitKishori Bhajan

लाभ कहा कंचन तन पाये।
भजे न मृदुल कमल-दल-लोचन, दुख-मोचन हरि हरखि न ध्याये॥१॥

तन-मन-धन अरपन ना कीन्हों, प्रान प्रानपति गुननि न गाये।
जोबन, धन कलधौत-धाम सब, मिथ्या आयु गँवाय गँवाये॥२॥

गुरुजन गरब, बिमुख-रँग-राते डोलत सुख संपति बिसराये।
ललितकिसोरी मिटै ताप ना, बिनु दृढ़ चिंतामनि उर लाये॥३॥


  बिंदु जी महाराज के भजन / पद / लिरिक्स Bindu Ji ke Bhajan /Pad /Lyrics 

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