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लटक लटक मनमोहन आवनि ललित किशोरी भजन

 Latak Latak Manmohan Aavni LalitKishori Bhajan

लटक लटक मनमोहन आवनि।
झूमि झूमि पग धरत भूमिपर गति मातंग लजावनि॥

गोखुर-रेनुअंग अँग मंडित उपमा दृग सकुचावनि।
नव घनपै मनु झीन बदरिया, सोभा-रस बरसावनि॥

बिगसति मुखलौं कानि दामिनी दसनावलि दमकावनि।
बीच-बीच घनघोर माधुरी, मधुरी बेन बजावनि॥

मुकतमाल उर लसी छबीली, मनु बग-पाँति सुहावन।
बिंदु गुलाल गुपाल-कपोलन, इंद्रबधू छबि छावनि॥

रुनन झुनन किंकिनि धुनि मानों हंसनिकी चुहचावनि।
बिलुलित अलक धूरि धूसरतन, गमन लोटि भुव आवनि॥

जँघिया लसनि कनक कछनी पै, पटुका ऐंचि बँधावनि।
पीताम्बर फहरानि मुकुतछबि, नटवर बेस बनावनि॥

हलनि बुलाक अधर तिरछौंही बीरी सुरँग रचावनि।
ललितकिसोरी फूल-झरनियाँ मधुर-मधुर बतरावनि॥


  बिंदु जी महाराज के भजन / पद / लिरिक्स Bindu Ji ke Bhajan /Pad /Lyrics 

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