कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ भजन / Maili Chadar Odh Ke Kaise DwarTumhare Aoon Bhajan

 

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ।
हे पावन परमेश्वर मेरे मन ही मन शरमाऊं ॥

तूने मुझको जग में भेजा निर्मल देकर काया ।
आकर के संसार में मैंने इसको दाग लगाया ।
जनम जनम की मैली चादर कैसे दाग छुड़ाऊं ॥

निर्मल वाणी पाकर मैने नाम न तेरा गाया ।
नयन मूंद कर हे परमेश्वर कभी न तुझको ध्याया ।
मन वीणा की तारें टूटीं अब क्या गीत सुनाऊं ॥

इन पैरों से चल कर तेरे मन्दिर कभी न आया ।
जहां जहां हो पूजा तेरी कभी न शीश झुकाया ।
हे हरि हर मैं हार के आया अब क्या हार चढ़ाऊं ॥ 

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *