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मैं घनश्याम का बाबला हो रहा हूँ बिन्दु जी भजन

  Main Ghanashyam Ka Babla HoRaha Hoon Bindu Ji Bhajan

मैं घनश्याम का बबला हो रहा हूँ,
कभी हँस रहा हूँ कभी रो रहा हूँ।
जो आँखों से हरदम निकलते हैं मोती,
ये तोहफा उन्हीं के लिए हो रहा हूँ।
न रहा जाय कालिख लगी कुछ इसी से,
विरह जल में मलमल के दिल धो रहा हूँ।
नहीं अश्रु के ‘बिन्दु’ गिरते जमीं पर,
ये कुछ प्रेम के बीज मैं बो रहा हूँ॥ 

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