कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

रघुवर चरित अमित सुक दायक संत जूड़ीराम भजन / Raghubar Charit Amit Suk Dayak Sant Joodiram Bhajan

 

रघुवर चरित अमित सुक दायक सोई मेरे मन भाया है।
बहुतक जतन करे ई तन में विन सतसंग न पाया है।
सब्द सनेही सतगुरु मेरा धुन पर चित्त चड़ाया है।
सेस महेश गनेश जपत सोई नर-नारन में छाया है।
वेद पुरान भागवत गीता विमल-विमल जश गाया है।
सब्द सांक परतीत मान मन दृष्ट परे सो माया है।
ग्यान द्रष्ट आ द्रिष्ट अगोचर पूरन ब्रह्म कहाया है।
निरभें नाम जपो रघुवर को दुबदा दूर भगाया है।
जूड़ीराम आनन्द मगन उर मिटत दुख सुख छाया है।





0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *