कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

राम दो निज चरणों में स्थान भजन / Ram Do Nij Charanon Mein Sthan Bhajan

 

राम दो निज चरणों में स्थान
शरणागत अपना जन जान

अधमाधम मैं पतित पुरातन ।
साधन हीन निराश दुखी मन।
अंधकार में भटक रहा हूँ ।
राह दिखाओ अंगुली थाम।
राम दो …

सर्वशक्तिमय राम जपूँ मैं ।
दिव्य शान्ति आनन्द छकूँ मैं।
सिमरन करूं निरंतर प्रभु मैं ।
राम नाम मुद मंगल धाम।
राम दो …

केवल राम नाम ही जानूं ।
और धर्म मत ना पहिचानूं ।
जो गुरु मंत्र दिया सतगुरु ने।
उसमें है सबका कल्याण।
राम दो …

हनुमत जैसा अतुलित बल दो ।
पर-सेवा का भाव प्रबल दो ।
बुद्धि विवेक शक्ति सम्बल दो ।
पूरा करूं राम का काम।
राम दो निज चरणों में स्थान 

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *