कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

राम झरोखे बैठ के सब का मुजरा लेत भजन / Ram Jharokhe Baith Ke Sab KaMujra Let Bhajan

 

राम झरोखे बैठ के सब का मुजरा लेत ।
जैसी जाकी चाकरी वैसा वाको देत ॥
राम करे सो होय रे मनवा राम करे सो होये ॥

कोमल मन काहे को दुखाये काहे भरे तोरे नैना ।
जैसी जाकी करनी होगी वैसा पड़ेगा भरना ।
काहे धीरज खोये रे मनवा काहे धीरज खोये ॥

पतित पावन नाम है वाको रख मन में विश्वास ।
कर्म किये जा अपना रे बंदे छोड़ दे फल की आस ।
राह दिखाऊँ तोहे रे मनवा राह दिखाऊँ तोहे ॥ 

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *