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रे मन! ये दो दिन का मेला रहेगा बिन्दु जी भजन

 Re Man! Ye Do Din Ka MelaRahega Bindu Ji Bhajan

रे मन! ये दो दिन का मेला रहेगा।
कायम न जग का झमेला रहेगा॥
किस काम ऊँचा जो महल तू बनाएगा।
किस काम का लाखों जो तोड़ा कमाएगा॥
रथ-हाथियों का झुण्ड भी किस काम आएगा।
तू जैसा यहाँ आया था वैसा हीं जाएगा॥
तेरे हीं सफ़र में सवारी की खातिर।
कन्धों पै गठरी का मैला रहेगा॥ 

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