कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

सगुण रूप में सद्गुरू अइलै /Sagun Roop Mein Sadguru Ailai, Ramdhari Singh 'Kavyatirth'

 

सगुण रूप में सद्गुरू अइलै
सतपाल नाम धरैलकै हो।
सगुण-अगुन बीच कुच्छु भेद नै।
प्रेमी के निर्मल ज्ञान बतैलकै हो।
घट-घट में निर्गुण ब्रहह्म बसै छै
सब्भे सन्तें बतैलकै हो
मुहम्मद ईसा राम कृष्ण ने
एक्के ज्ञान बाँटलकै हो। 



0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *