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सोई सुहागनि साँच सिगार दादू दयाल भजन / Soi Suhagani Saach Sigar Dadu Dayal Bhajan

 

सोई सुहागनि साँच सिगार।
तन-मन लाइ भजै भरतार॥टेक॥

भाव-भगत प्रेम-लौ लावै।
नारी सोई सुख पावै॥१॥

सहज सँतोष सील जब आया।
तब नारी नाह अमोलिक पाया॥२॥

तन मन जोबन सौपि सब दीन्हा।
तब कंत रिझाइ आप बस कीन्हा॥३॥

दादू बहुरि बियोग न होई।
पिवसूँ प्रीति सुहागनि सोई॥४॥

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