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सुगवा पिंजरवा छोरि भागा कबीर भजन / Sugwa Pinjirwa Chhori Bhaga Kabir Bhajan

 

सुगवा पिंजरवा छोरि भागा।टेक॥
इस पिंजरे में दस दरवाजा,
दसो दरवाजे किवरवा लागा॥1॥
अँखियन सेती नीर बहन लाग्यो,
अब कस नाहिं तू बोलत अभागा॥2॥
कहत कबीर सुनो भाइ साधो,
उड़िगे हंस टूटि गयो तागा॥3॥

 

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