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तीलक लगौने धनुष कान्ह पर टूटा बालक ठाढ़ छै / Teelak lagawne dhanush Kanha par toota balak thadh chhai Vidyapati

तीलक लगौने धनुष कान्ह पर टूटा बालक ठाढ़ छै
घुमि रहल छै जनकबाग में फूल तोरथ लेल ठाढ़ छै
श्याम रंग जे सबसँ सन्नर से सबहक सरदार छै
नाम पुछई छै राम कहै छै अबध के राजकुमार छै
धनुष प्रतीज्ञा कैल जनकजी के पूरा केनीहार छै
देस-देस के नृप आबि कढ धनैत अपन कघर छै
कियो बीर नहि बुझि पड़ै जछि तँ जनक के धिक्कार छै
एतबा सुनतहिं बजला लक्ष्मण ई कोन कठि पहार छै
बुझबा में नहिं अयलन्हि जनक कें एहि ठाम शेषावगर छै
चुटकी सँ मलि देब धनुष के ई त बड़ निस्सार छै
उठि क विश्वामित्र तखन सँ रा के करैत ठाढ़ छै
जखनहिं राम उठोलन्हि धनुष मचि गेल जय-जय कार छै
धन्य राम छथि धन्य लखनजी जानैत भरि संसार छै
साजि सखी के संग सीयाजी हाथ लेने जयमाल छै
तीलक लगौने धनुष कान्ह पर टूटा बालक ठाढ़ छै

यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
 

 

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