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हे हर मन द करहुँ प्रतिपाल / Hey Har man d karu pratipal Vidyapati

हे हर मन द करहुँ प्रतिपाल,
सब बिधि बन्धलहुँ माया जाल।
हे हर मन।

सब दिन रहलहुँ अनके आस,
अब हम जायब केकरा पास।
हे हर मन।

बीतल बयस तीन पल मोरा,
धयल शरण शिव मापन तोरा।
हे हर मन।

यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
 

 गौरा तोर अंगना / Gaura tor angna Vidyapati

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