अंबिकादत्त व्यास के दोहे / Ambika Datt Vyas ke Dohe
गुंजा री तू धन्य है, बसत तेरे मुख स्याम।
यातें उर लाये रहत, हरि तोको बस जाम॥
मोर सदा पिउ-पिउ करत, नाचत लखि घनश्याम।
यासों ताकी पाँखहूँ, सिर धारी घनश्याम॥
अगस्त 19, 2025 | No Comments |
गुंजा री तू धन्य है, बसत तेरे मुख स्याम।
यातें उर लाये रहत, हरि तोको बस जाम॥
मोर सदा पिउ-पिउ करत, नाचत लखि घनश्याम।
यासों ताकी पाँखहूँ, सिर धारी घनश्याम॥
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