कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

मैं वही दर्पण, वही ना जाने ये क्या हो गया – Main Wahi Darpan Wahi

 मैं वही दर्पण वही, ना जाने ये क्या हो गया

कि सब कुछ लागे नया नया


इक जादू की छड़ी, तन मन पे पड़ी

मैं जहाँ की रे गई वहीं पे खड़ी

घर वही, आँगन वही, ना जाने ...


कहीं दूर पपीहा बोले पिया पिया

उड़ जाने को बेकल है मोर जिया

दिल वही धड़कन वही, ना जाने ...

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