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मन भावन के घर जाए गोरी / Man Bhavan Ke Ghar Jaye Gori

 मन भावन के घर जाए गोरी

घूँघट में शरमाए गोरी

बंधी रहे ये प्यार की डोरी

हमें ना भुलाना...


बचपन के दिन खेल गंवाए

आई जवानी तो बालम आए

तेरे आंगन बंधे बधाई गोरी

क्यों नैना छलकाए गोरी

हमें ना भुलाना...


इस दुनिया की रीत यही है

हाथ जो थामे मीत वही है

अब हम तो हुए पराए गोरी

फिर तेरे संग जाए गोरी

हमें ना भुलाना...


मस्ती भरे सावन के झूले

तुझको कसम है जो तू भूले

अब के जब वापस आए गोरी

गोद भरी ले आए गोरी

हमें ना भुलाना...

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