कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

मुझको यह ज़हर न चाहिए / Mujhko Yah Zahar Na Chahiye

 मुझे तुम से कुछ भी न चाहिए

मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो

मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो

मेरा दिल अगर कोई दिल न था

उसे मेरे सामने तोड़ दो

मुझे तुम से कुछ भी न चाहिए ...


मैं ये भूल जाऊँगा ज़िन्दगी

कभी मुस्कुराई थी प्यार में

मैं ये भूल जाऊँगा मेरा दिल

कभी खिल उठा था बहार में

जिन्हें इस जहाँ ने भुला दिया

मेरा नाम उन में ही जोड़ दो

मुझे तुम से कुछ भी न चाहिए ...


तुम्हें अपना कहने की चाह में

कभी हो सके न किसी के हम

यही दर्द मेरे जिगर में है

मुझे मार डालेगा बस ये ग़म

मैं वो गुल हूँ जो न खिला कभी

मुझे क्यों न शाख़ से तोड़ दो

मुझे तुम से कुछ भी न चाहिए ...

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *