कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

ये शाम की तनहाइयाँ, ऎसे में तेरा ग़म / Ye Shaam Ki Tanhaiyan, Aise Mein Tera Gham

 ये शाम की तन्हाइयाँ ऐसे में तेरा ग़म

पत्ते कहीं खड़के हवा आई तो चौंके हम

ये शाम की तन्हाइयाँ ...


जिस राह से तुम आने को थे

उस के निशाँ भी मिटने लगे

आये न तुम सौ सौ दफ़ा आये गये मौसम

ये शाम की तन्हाइयाँ ...


सीने से लगा तेरी याद को

रोती रही मैं रात को

हालत पे मेरी चाँद तारे रो गये शबनम

ये शाम की तन्हाइयाँ ...

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *