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Zulfon Ki Ghata Lekar Sawan Ki Pari Aayi Lyrics – ज़ुल्फ़ों की घटा ले कर सावन

 रोचक तथ्य

Reshmi Rumal (1961)


ज़ुल्फ़ों की घटा ले कर सावन की परी आई

बरसेगी तिरे दिल पर हँस-हँस के जो लहराई


मचले हुए इस दिल में अरमान हज़ारों हैं

बेताब निगाहों में तूफ़ान हज़ारों हैं


तुझ से न बिछड़ने की इस दिल ने क़सम खाई

आती हो तो आँखों में बिजली सी चमकती है


शायद ये मोहब्बत है आँखों से छलकती है

छोड़ूँ न तिरा दामन मैं हूँ तिरा सौदाई


सुर्ख़ी है मोहब्बत की इन फूल से गालों में

क्या चीज़ मैं लाई हूँ इन आँखों के प्याले में


आ तुझ को बता दूँ मैं ओ हुस्न के शैदाई

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