आरती पारसनाथ स्वामी – Aarti Shri Parshvanath Ji in Hindi
भगवान पार्श्वनाथ की यह आरती "ॐ जय पारस देवा" के बोल से शुरू होती है और लगभग हर जैन घर-मंदिर में गाई जाती है। इसके बोल सरल हैं, फिर भी भावों से भरपूर।
ॐ जय पारस देवा, स्वामी जय पारस देवा |
सुर नर मुनिजन तुम चरणन की, करते नित सेवा |
ॐ जय पारस देवा ||
पौष वदी ग्यारस काशी में, आनंद अतिभारी-2,
अश्वसेन वामा माता उर-2, लीनो अवतारी |
ॐ जय पारस देवा ||
श्यामवरण नवहस्त काय पग, उरग लखन सोहें-2,
सुरकृत अति अनुपम पा भूषण-2, सबका मन मोहें |
ॐ जय पारस देवा ||
जलते देख नाग नागिन को, मंत्र नवकार दिया-2,
हरा कमठ का मान ज्ञान का-2, भानु प्रकाश किया |
ॐ जय पारस देवा ||
मात पिता तुम स्वामी मेरे, आस करूँ किसकी-2,
तुम बिन दाता और न कोर्इ-2, शरण गहूँ जिसकी |
ॐ जय पारस देवा ||
तुम परमातम तुम अध्यातम, तुम अंतर्यामी-2,
स्वर्ग-मोक्ष के दाता तुम हो-2, त्रिभुवन के स्वामी |
ॐ जय पारस देवा ||
दीनबंधु दु:खहरण जिनेश्वर, तुम ही हो मेरे-2,
दो शिवधाम को वास दास-2, हम द्वार खड़े तेरे |
ॐ जय पारस देवा ||
विपद-विकार मिटाओ मन का, अर्ज सुनो दाता-2,
सेवक द्वै-कर जोड़ प्रभु के-2, चरणों चित लाता |
ॐ जय पारस देवा ||
ॐ जय पारस देवा, स्वामी जय पारस देवा |
सुर नर मुनिजन तुम चरणन की, करते नित सेवा |
ॐ जय पारस देवा ||
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