आरती चन्द्रप्रभु जी भगवान (तिजारा) – Chandraprabhu Aarti in Hindi

आरती चन्द्रप्रभु जी भगवान (तिजारा)

अलवर के तिजारा नगर में विराजमान श्री चन्द्रप्रभु भगवान की यह आरती श्रद्धालुओं में बेहद लोकप्रिय है। सीता, मैना और अंजन चोर जैसे प्रसंगों का भी इसमें सुंदर वर्णन मिलता है।

म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी |
म्हारे मन भाई जी, म्हारे मन भाई जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

सावन सुदि दशमी तिथि आई, प्रगटे त्रिभुवन राई जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

अलवर प्रांत में नगर तिजारा, दरसे देहरे मांही जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

सीता सती ने तुमको ध्याया, अग्नि में कमल रचाया जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

मैना सती ने तुमको ध्याया, पति का कुष्ट मिटाया जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

जिनमें भूत प्रेत नित आते, उनका साथ छुड़ाया जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

सोमा सती ने तुमको ध्याया, नाग का हार बनाया जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

मानतुंग मुनि तुमको ध्याया, ताले तोड़ छुड़ाया जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

जो भी दु:खिया दर पर आया, उसका कष्ट मिटाया जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

अंजन चोर ने तुमको ध्याया, शस्त्रों से अधर उठाया जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

सेठ सुदर्शन तुमको ध्याया, सूली का सिंहासन बनाया जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

समवसरण में जो कोर्इ आया, उसको पार लगाया जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

रत्न-जड़ित सिंहासन सोहे, ता पे अधर विराजे जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

तीन छत्र शीष पर सोहें, चौंसठ चंवर ढुरावें जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

ठाड़ो सेवक अर्ज करे छे, जनम मरण मिटाओ जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

भक्त तुम्हारे तुमको ध्यावें, बेड़ा पार लगाओ जी |
म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भाई जी ||

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